
जयपुर।
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील की बंद कमरे में मुलाक़ात चर्चा का विषय बनी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक में इन दोनों नेताओं के बीच मुलाक़ात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। ज़ाहिर है चुनाव से ऐन पहले दो अलग-अलग समाजों से आने वाले इन दिग्गज नेताओं की मुलाक़ात की चर्चा होना और अटकलें लगना स्वाभाविक भी है।
कब-क्यों हुई मुलाक़ात?
सोशल मीडिया पर अचानक से चर्चा का विषय बनी पायलट संग मुलाक़ात पर जाट महासभा अध्यक्ष राजाराम मील ने 'पत्रिका' को बताया कि ये तस्वीरें दो-तीन दिन पहले की हैं। उन्होंने बताया कि पायलट के साथ कई महत्वपूर्ण मसलों पर बातचीत हुई है, जिनमें मौजूदा राजनीतिक हालात और विधानसभा चुनाव से जुड़े विषय भी शामिल रहे।
मील ने बताया कि पायलट से मुलाक़ात में उन्होंने सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व को लेकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि सीएम गहलोत के नेतृत्व से इस चुनाव में उतरने का खामियाज़ा कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ेगा। उन्होंने पायलट से कांग्रेस को संभालने का आग्रह किया।
जाट सीएम की मांग बरकरार
जाट महासभा अध्यक्ष राजाराम मील प्रदेश में किसी जाट समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग पर बरकरार हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारी जाट मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग पर हम कायम हैं। मील ने कहा कि इसी मांग को एक बार फिर सचिन पायलट से मुलाक़ात में सामने रखा है।
जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील दरअसल, गहलोत सरकार की कार्यशैली को लेकर कई बार अपनी नाराज़गी जता चुके हैं। उनकी हालिया नाराज़गी गहलोत सरकार के आरपीएससी सदस्य केसरी सिंह को लेकर दिखी थी। इस बारे में उन्होंने बाकायदा दिल्ली पहुंचकर एआईसीसी महासचिव वेणुगोपाल से मिलकर भी शिकायत की थी।
उचित प्रतिनिधित्व की है मांग
राजाराम मील पिछले कुछ दिनों से ज़्यादा सक्रीय दिख रहे हैं। फिलहाल वे राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलकर जाट समाज को टिकट वितरण से लेकर 'संभावित' सरकार में उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग कर रहे हैं। पायलट से पहले वे भाजपा और आप पार्टी के नेताओं से भी मुलाकातें कर चुके हैं।
ये है दलील...
राजस्थान जाट महासभा अध्यक्ष राजाराम मील का कहना है कि राज्य में जाट समाज की लगभग 20 प्रतिशत जनसंख्या है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जाट महाकुंभ में में 'जिनकी जितनी भागीदारी, उनकी उतनी हिस्सेदारी' फार्मूले पर मंथन हुआ था और जाट समाज को दोनों मुख्य पार्टियों में 40-40 सीट देने की मांग थी।
Updated on:
25 Oct 2023 03:29 pm
Published on:
25 Oct 2023 03:28 pm
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