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Sachin Pilot ने Army यूनिफॉर्म पहने शेयर की तस्वीरें, लिखा- ‘जय हिन्द’, जाने अचानक ऐसा करने की वजह

Sachin Pilot shares Pics in Army Uniform on Territorial Army Day: राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बुधवार को टेरिटोरियल आर्मी की यूनिफॉर्म में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कीं। टेरिटोरियल आर्मी डे के मौके पर अपलोड पोस्ट में पायलट ने एक मैसेज भी साझा किया है।

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जयपुर।

Sachin Pilot shares Pics in Army Uniform on Territorial Army Day: राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बुधवार को टेरिटोरियल आर्मी की यूनिफॉर्म में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कीं। टेरिटोरियल आर्मी डे के मौके पर अपलोड पोस्ट में पायलट ने एक मैसेज भी साझा किया है।


यूनिफॉर्म पहने अपनी पुरानी तस्वीर के साथ पायलट ने लिखा, 'सशस्त्र बलों से प्रेरित होकर, मैं प्रादेशिक सेना में शामिल हुआ। इतना ही नहीं मैंने न सिर्फ अपना सपना पूरा किया, बल्कि मुझे भारत की सेवा करने का एक और मौक़ा भी मिला। आज जब हम प्रादेशिक सेना के गठन का जश्न मना रहे हैं, हम पुरुषों और महिलाओं को वर्दी में इसे मनाते हैं जो हमारी सीमाओं, घरों और जीवन के रास्ते की रक्षा करते हैं, जय हिंद।

7 साल पहले ज्वाइन की थी टेरिटोरियल आर्मी

सचिन पायलट ने सात साल पहले वर्ष 2012 में टेरिटोरियल आर्मी ज्वाइन की थी। वे उस समय केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री थे। टेरिटोरियल आर्मी ज्वाइन करने के साथ ही पायलट इसमें लेफ्टिनेंट बन गए थे। उन्हें बतौर रेग्युलर ऑफिसर टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया गया था। पायलट ये उपलब्धि हासिल करने वाले पहले मंत्री हैं।


दरअसल, सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट और दादा जय दयाल भी सेना से ही जुड़े थे। दादा इंफेंट्री में सैनिक थे। पिता वायुसेना में लड़ाकू पायलट थे। साल 2012 में हुए एक कार्यक्रम में तब के सेना प्रमुख रहे जनरल बिक्रम सिंह ने साउथ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय में सचिन पायलट के कंधे पर रैंक का फीता लगाकर उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया था।उस दौरान पायलट की मां रमा पायलट भी उपस्थित थीं।

सचिन पायलट को सेना की 124 वीं सिख बटालियन के साथ संबद्ध किया गया। इसके बाद सचिन ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश थी सेना में शामिल होना, जो आज पूरी हुई।

जाने क्या होती है टेरिटोरियल आर्मी

टेरिटोरियल आर्मी यानी प्रादेशिक सेना, भारतीय सेना की एक ईकाई और सेवा है। इसके स्वयंसेवकों को प्रतिवर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिए उनकी सेवायें ली जा सकें।


भारतीय संविधान सभा द्वारा सितंबर, 1948 में पारित प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948, के अनुसार भारत में अक्टूबर, 1949 में प्रादेशिक सेना स्थापित हुई। इसका उद्देश्य संकटकाल में आंतरिक सुरक्षा का दायित्व लेना और आवश्यकता पड़ने पर नियमित सेना को यूनिट (दल) प्रदान करना है। साथ ही नवयुवकों को देशसेवा का अवसर प्रदान करना है। इसमें होने के लिए आयु सीमा 18 और 35 वर्ष है। सेवानिवृत्त सैनिकों और प्राविधिज्ञ सिविलियनों के लिए शिथिलता दी जा सकती है।