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साल भर फल देता है ‘सदाबहार’आम

साल भर फल देता है 'सदाबहार'आमदुनिया का एकमात्र हाईब्रिड आम है 'सदाबहार'कोटा के किसान किशन सुमन ने किया था नवाचारराष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बने 'सदाबहार'

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Mar 17, 2020

साल भर फल देता है 'सदाबहार'आम

साल भर फल देता है 'सदाबहार'आम

फलों का राजा आम आमतौर पर गर्मी के मौसम में ही पैदा होता है लेकिन अब नई तकनीक से इसका उत्पादन अन्य सीजनों में भी हो रहा है। देश में आम की तकरीबन 1500 से भी अधिक किस्में पाई जाती हैं हर किस्म का अपना एक महत्व है। एेसी ही एक किस्म विकसित की है कोटा के एक किसान किशन सुमन ने। उन्होंने एेसी प्रजाति विकसित की है जो पूरे साल भर फल देती है इसलिए इसका नाम रखा गया है 'सदाबहारÓ।

सदाबहार में है अल्फांसो की खूबी
कोटा में बागवानी करने वाले गिरधरपुरा गांव के किसान किशन सुमन की बाग से उत्पादित होने वाला सदाबहार आम की कुछ खूबी अल्फांसो आम की तरह हैं। अल्फांसो भारत का सब से खास किस्म का आम है। इसे आम का सरताज कहा जाता है। बस इसी सरताज से मिलती जुलती चीजों जैसा सदाबहार आम है। आम की ये प्रजाति अपने आप में अलग तरीके की है।

राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बने 'सदाबहारÓ
किशन सुमन की ओर से उत्पादित की जा रही आम की ये किस्म अब राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन की शान बन चुकी हैं। सदाबहार आम के यहां चार पौधे लगे हैं। किशन के अनुसार एक पौधा लगभग 5 साल बाद फल देता है। किशन बताते हैं 1995 में गुलाब, मोगरा और मयूरपंखी की खेती शुरू की और तीन वर्षों तक फूलों की खेती करते रहे। इसी दौरान उन्होंने गुलाब के ऐसी किस्म को विकसित किया जिसमें एक ही पौधे में सात रंग के फूल लगते हैं। इससे अच्छा रिटर्न मिला। इसके बाद उन्होंने अन्य फसलों पर भी काम करना शुरू किया। सुमन का कहना है कि मैंने सोचा कि अगर मैं गुलाब की किस्म में परिवर्तन कर सकता हूं तो फिर आमों के साथ क्यों नहीं। मैंने विभिन्न किस्मों के आमों को इकठ‍्ठा किया और उन्हें पोषित किया। जब पौधे पर्याप्त बड़े हो गए, तो मैंने उन्हें रूटस्टॉक पर तैयार किया।

2000 में मिली कामयाबी
गुलाब किशन को कामयाबी 2000 में मिलती दिखी। उन्होंने अपने बगीचे में एक आम के पेड़ की पहचान की, जो तीन मौसमों में खिल गया था। जनवरी.फरवरी, जून.जुलाई और सितंबर.अक्टूबर। उन्होंने पांच पेड़ों को एक प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया। नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से मिली प्रेरणा के बाद किशन ने ११ सालों तक देश के विभिन्न स्थानों पर जाकर अपनी किस्म के पौधे लगाए। वह कहते है कि एनआईएफ को मैंने 2012 में 20 पौधों का उपहार दिया था। अब पेड़ फल दे रहा है और जब फल पकता है, त्वचा नारंगी रंग प्राप्त करती है, जबकि अंदरूनी फल गेरुआ रंग का होता है।

किशन सुमन को मिल चुके हैं कई अवॉर्ड
खास प्रकार की किस्म को विकसित करने वाले किशन सुमन को अब तक कई अवॉर्ड भी दिए जा चुके हैं। मार्च 2017 में सुमन को 9वीं द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन और राष्ट्रपति भवन में आयोजित उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान के दौरान फार्म इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। किशन का कहना है कि आम की इस नस्ल को किचन ग्रार्डन में बर्तन में रखकर कुछ समय बाद उत्पादित किया जा सकता है। वे कहते हैं कि मौजूदा किस्मों की स्थिति को देखते हुए इसकी क्षमता बड़ी है। ऑक्सीजन की अत्याधिक उपलब्धता होने के कारण ये उत्पादकों के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है। वे कहते हैं कि ये किस्म देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का एकमात्र हाईब्रिड आम है जो कि साल में तीन बार फल देता है।