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संत-महात्मा चलते फिरते तीर्थ हैं : स्वामी परमात्मानंद

जयपुर

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Newsdesk

Aug 04, 2026

Rajasthan

कोलकाता. जगतगुरू स्वामी परमात्मानंद गिरी महाराज ने ब्रह्ममयी काली मंदिर, नोआपाड़ा पधारने पर स्वामी अनन्त बोध चैतन्य महाराज का स्वागत किया। परमात्मानंद महाराज ने बंगभूमि में देवी काली और देवी दुर्गा की रामकृष्ण परमहंस, मां शारदा, स्वामी विवेकानंद, बंकिम चंद्र चटर्जी एवं श्रद्धालु भक्तों द्वारा की गई साधना-आराधना पर कहा कि भारतीय अध्यात्म-संस्कृति में संत-महात्मा चलते फिरते तीर्थ हैं। वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वधर्म सद्भावना भारतीय धर्म-संस्कृति है। अनन्त बोध चैतन्य महाराज ने कहा कि संत-महात्मा सत्य, करुणा और समभाव से परिपूर्ण होता है। वह लोभ-लालच से परे, निष्काम भाव से श्रद्धालु भक्तों का मार्गदर्शन करता है। उनका आचरण धर्म शास्त्रों के अनुकूल होता है। वे कभी किसी की बुराई नहीं करते और उनके मन में सभी जीवों के लिए समान प्रेम होता है। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं के स्वभाव में अहंकार नहीं होता। उनका जीवन सादगीपूर्ण और निष्कपट होता है। वे हमेशा मधुर, सत्य और संयमित बोलते हैं। इस अवसर पर अनन्त बोध चैतन्य महाराज एवं पोद्दार सेवा ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. अशोक पोद्दार ने स्वामी परमात्मानंद महाराज को सनातनी योद्धा सम्मान से सम्मानित किया।