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सोशल मीडिया पर गन और गोली की बिक्री, नाबालिगों से होम डिलीवरी

राजधानी में फूड, ग्रॉसरी आइटम की तर्ज पर कारतूस की होम डिलीवरी

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जयपुर

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GAURAV JAIN

Jul 05, 2023

सोशल मीडिया पर गन और गोली की बिक्री, नाबालिगों से होम डिलीवरी

सोशल मीडिया पर गन और गोली की बिक्री, नाबालिगों से होम डिलीवरी

जयपुर. फूड, ग्रॉसरी आइटम की तर्ज पर सोशल मीडिया के जरिए हथियारों के बाद कारतूस की भी होम डिलीवरी हो रही है। इस पर आप भले ही विश्वास न करें, लेकिन सच्चाई यही है। राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने सोशल मीडिया पर कारतूस की होम डिलीवरी के विज्ञापन की हकीकत जानने के लिए एक नंबर पर संपर्क किया। सप्लायर ने खाने के मैन्यू की तरह कट्टा, पिस्टल और 9 एमएम कारतूस की फोटो और कीमत तक भेज दी। इसके बाद सप्लायर ने वाट्सऐप पर वॉइस मैसेज तक भेजे।

यों हो रही कारतूस की डिलीवरी
सवाल- कारतूस उपलब्ध हैं क्या?
जवाब - हां, जो चाहो मिल जाएगा
सवाल- कीमत क्या है ?

जवाब - 80 रुपए से 150 रुपए तक
सवाल- महंगे हैं, कम नहीं होगा क्या?

जवाब -कारतूस का मामला है... हथियार होते तो सोच लेते
सवाल- डिलीवरी कौन करेगा

जवाब- आपकी लोकेशन पर डिलीवरी हो जाएगी। मेरा लड़का कर देगा
सवाल- पेमेंट कैसे करना होगा ?

जवाब - बीस प्रतिशत एडवांस दे दीजिए, डिलीवरी पर कैश दे देना

सीमावर्ती राज्यों से सप्लाई

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से सोशल मीडिया के जरिए कारतूस की सप्लाई राजधानी में हो रही है। इसके लिए मात्र बीस प्रतिशत राशि एडवांस और बाकी राशि का भुगतान कारतूस डिलीवर होने के बाद किया जाता है। कारतूस की सप्लाई नूंह, मेरठ, कानपुर, भिंड और मुरैना इलाकों से हो रही है। यह नेटवर्क धीरे-धीरे पूरे देश में जड़ें जमा रहा है। पकड़े जाने से बचने के लिए कारतूस की डिलीवरी के लिए किशोर और बुजुर्गों को भेजा जाता है।


वीडियो बनाकर दे रहे जानकारी

सोशल मीडिया पर ग्रुप व पेज बनाकर कारतूसों की लगातार खरीद फरोख्त हो रही है। इतना ही नहीं वीडियो बनाकर कारतूस की गुणवत्ता के बारे में भी बताया जा रहा है। पिस्टल की मैगजीन में कारतूस लोड करने जैसे ट्यूटोरियल की आड़ में कारतूस की खरीद फरोख्त हो रही है।

व्यापारियों पर हुए हमले

-केस नं -1 - जवाहर सर्कल स्थित इलाके में जी क्लब 17 राउंड फायर कर किए गए। क्लब के मालिक से रोहित गोदारा ने रंगदारी मांगी थी।

-केस नं -2- सांगानेर इलाके में प्रॉपर्टी डीलर के पैर पर तीन गोलियां मारी गई। फायरिंग करने वालों ने खुद को लॉरेंस गैंग का गुर्गा बताया।


यह है वैधानिक तरीका
शस्त्र लाइसेंस धारक एक बार में गन हाउस से पचास गोलियां ही इशू करवा सकता है। यदि कोई पचास से ज्यादा गोलियां गन हाउस से लाता भी है तो कानूनी रूप से गलत है। इन कारतूस के दाम अलग अलग होते है। वहीं खिलाड़ियों को जारी की जाने वाली गोलियों की संख्या ज्यादा होती है क्योंकि उन्हें रोजाना प्रैक्टिस करनी होती है।


कमिश्नरेट की साइबर और स्पेशल टीम सोशल मीडिया पर हथियारों और कारतूसों की पोस्ट डालने वालों को लगातार मॉनिटर करती है। क्राइम ब्रांच ने सोशल मीडिया के माध्यम से हथियार की खरीद फरोख्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।
-आनंद श्रीवास्तव, जयपुर पुलिस कमिश्नर

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