
भेड़ के बालों की बिक्री थमी,जीविकोपार्जन करने की समस्या
बूंदी के जजावर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में भेड़ पालन कर जीविकोपार्जन करने वाले लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। भेड़ों के बाल बेचकर गृहस्थी चलाने वाले पालकों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।
भेडि़हारों को बदले समय में रोटी का संकट झेलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी ने तो परंपरागत कार्य को छोड़कर मजदूरी करना शुरू कर दिया है परंतु जीवन का आधा से अधिक हिस्सा इसमें लगाने के बाद भेड़पालकों को परिवार चलाने का दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है। सभी ने कपड़े के कारोबार की तरह ही भेड़ के बालों से बने उत्पादों की बिक्री के लिए व्यवस्था करवाने की मांग की है। उनके घर में भेड़ के बाल तो एकत्र हैं लेकिन उनकी बिक्री नहीं हो रही। भेड़पालकों का कहना है कि एक समय था जबकि बाल लेने के लिए ग्राहक बड़ी संख्या में आते थे और 25 रुपए प्रति किलो की दर से बालों को खरीद लेते थे, लेकिन अब बाल खरीदने वाले नहीं आ रहे हैं और कभी कोई खरीदने आ गया तो बाल की कीमत गिराकर बात करता है। 25 रुपए किलो की दर से बिकने वाले भेड़ों की बाल को पांच रुपए किलो का भी मूल्य नहीं मिल रहा है। आने वाले खरीदार तीन से चार रुपया किलो बाल मांगते हैं।
कई सालों से बंद है बिक्री
बूंदी के जजावर क्षेत्र में भेड़ पालन कर जीवन यापन करने वाले इन लोगों का परंपरागत रूप से भेड़पालन करना ही मुख्य कार्य रहा है। बदलते समय के साथ भेड़ के बालों से बने कंबल आदि की मांग घट जाने से इसकी बिक्री नहीं हो पा रही है लेकिन पिछले छह सात सालों से इनके मुख्य व्यवसाय पर भी ग्रहण लग गया। भेड़पालकों का कहना है कि अब बाल एकत्र होते हैं लेकिन कोई खरीदने नहीं आता एेसे में बालों को फेंकना पड़ रहा है।
साल में तीन बार कटते हैं बाल
भेड़ पालकों ने पत्रिका को बताया कि साल में तीन बार भेड़ के बाल काटे जाते हैं। बाल काटने वाला 20 रुपए प्रति भेड़ के हिसाब से मेहनताना लेता है।यदि समय पर भेड़ों के बाल नहीं काटे जाए तो वह एक निश्चित समय पर गिर जाते हैं और देर से बाल काटने पर भेड़ों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। जिस वजह से भेड़ों के बाल काटकर घर में रखना पड़ता है। एेसे में अब यह भेड़पालक सरकार से मदद की गुहार कर रहे हैं।
Published on:
25 Sept 2019 08:32 pm
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