
घर छोड़ने से पहले खेलते दिखे बच्चे, पत्रिका फोटो
Jaipur missing children: जयपुर के मुहाना मोड़ एलएनटी रोड से लापता हुए चार मासूम बच्चों की कहानी जितनी सामने आ रही है, उतने ही नए सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों को 23 जून की शाम गोरखपुर के पास स्थित पनियाला गांव में अपनी नानी के घर जाना था। इसके लिए ट्रेन की टिकट पहले से बुक थी। मामा का बेटा दरबीन, जिसके साथ बच्चों को रवाना होना था, वह खाटूश्यामजी के दर्शन कर वापस भी लौट चुका था। इसके बावजूद चारों बच्चे दोपहर में ही चुपचाप घर से निकल पड़े।
वे पैदल मालपुरा गेट बस स्टैंड पहुंचे, वहां से मिनी बस में रेलवे स्टेशन पहुंचे और फिर अपने स्तर पर नानी के घर जाने की यात्रा शुरू कर दी। घटनाक्रम से साफ है कि बच्चों ने यात्रा को लेकर पहले से कुछ योजना बना रखी थी, लेकिन इतनी जल्दबाजी क्यों की, इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। पुलिस जांच और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार बच्चों ने रेलवे स्टेशन पहुंचकर सुल्तानपुर की टिकट खरीदी। इसके बाद वे अयोध्या जाने वाली बस में सवार हो गए। उनका इरादा वहां से आगे गोरखपुर के पास पनियाला गांव पहुंचने का था।
लापता हुए बच्चों में अनिरुद्ध साहनी की बेटियां अंशिका और आराध्या तथा पप्पन साहनी के बच्चे सलोनी और सचिन हैं। सलोनी और सचिन की मां मधु साहनी ने बताया कि बच्चों ने अपने मन की बात किसी को नहीं बताई और बिना किसी को भनक लगे घर से निकल गए। बच्चों के लापता होने के बाद घर में किसी ने खाना तक नहीं खाया। उनकी सलामती की खबर मिलने के बाद ही परिवार ने राहत की सांस ली।
परिजनों के अनुसार चारों बच्चे रोज की तरह ट्यूशन से लौटे थे। इसके बाद वे मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ 'पहल दूज' खेल रहे थे। घर के बाहर उन्होंने ही पहल दूज के लिए लाइनें खींची थीं, यहीं वे खेलते थे। उनके साथ खेलने वाले बच्चे शुक्रवार को भी उसी खेल रहे थे, उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि खेल खत्म होने के कुछ देर बाद ही चारों बच्चे इतनी दूर निकल जाएंगे। मधु साहनी ने बताया कि दोनों बच्चे बेहद शांत स्वभाव के हैं। वे अधिकतर समय घर में ही रहते थे और केवल ट्यूशन के लिए बाहर जाते थे। पहली बार ऐसा हुआ जब वे बिना बताए घर से निकल गए। मोहल्ले के लोगों का भी कहना है कि उन्होंने बच्चों को कभी अकेले इधर-उधर घूमते नहीं देखा।
परिवार करीब डेढ़ वर्ष पहले जयपुर आकर बसा था। बच्चों का बाहरी दुनिया से ज्यादा संपर्क भी नहीं था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शाम को परिवार के साथ ननिहाल जाने की व्यवस्था पहले से थी, तो चारों बच्चे दोपहर में ही अकेले क्यों निकल पड़े? क्या यह नानी के घर जल्दी पहुंचने की मासूम जिद थी या इसके पीछे कोई और वजह थी? फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब न तो परिजनों के पास है और न ही पुलिस के पास। यही सवाल पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी गुत्थी बना हुआ है।
परिजनों ने बताया कि सलोनी और सचिन का अभी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ था। उनके प्रवेश की तैयारी पास के एक निजी स्कूल में चल रही थी। वहीं अंशिका और आराध्या पहले से ही नजदीकी निजी स्कूल में पढ़ रही थीं।
Updated on:
27 Jun 2026 06:44 am
Published on:
27 Jun 2026 06:43 am
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