राधा और उनकी सहेलियों ने भगवान कृष्ण का स्वागत करने के लिए फूलों के साथ जमीन पर सुंदर पैटर्न तैयार किए, जब वो शाम को अपनी गायों को चराने से लौटे थे। सांझ जिसे हिंदी में संध्या कहते हैं, यहीं से सांझी शब्द और सांझी कला की उत्पत्ति हुई है। लुप्त होने की कगार पर पर आ चुकी इसी सांझी कला को सहेजने का प्रयास कर रहे हैं यूनेस्को और नेशनल अवॉर्ड विनर कलाकार राम सोनी।
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जवाहर कला केंद्र में चल रहे लोकरंग फेस्ट में अपनी कला को प्रदर्शित कर रहे राम सोनी सांझी कला के उस्ताद हैं और मानते हैं कि सफलता कड़ी मेहनत करने और खुद को पूरी तरह से अपने काम के प्रति समर्पित होने से मिलती है। राम सोनी सांझी कला से जुड़े ऐसे कलाकार है जो जिनके परिवार की कई पीढिय़ां इस कला से जुड़ी हुई हैं। सुनिए और क्या कुछ कहा राम सोनी ने-