
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/नारनौल. जाने-माने फिल्मकार व अभिनेता सतीश कौशिक का पैतृक गांव धनौंदा में काफी आना-जाना रहा है। उनके निधन से गांव में शोक की लहर है। कौशिक ने बचपन में हर साल गर्मी की छुट्टियां इसी गांव में बिताई। मुंबई शिफ्ट होने के बाद भी वे साल-डेढ़ साल में यहां एक चक्कर जरूर लगा लेते थे। गांव आते थे तो बचपन के साथियों के साथ पूरे गांव में घूमा करते थे।
बाजरे की रोटी-सरसों का साग फेवरेट खाना
सतीश कौशिक के चचेरे भाई सुभाष बताते हैं कि वह हफ्ते भर में फोन करके हाल-चाल जरूर पूछ लेता था। जब भी गांव आता तो बाजरे की रोटी और सरसों का साग उसका फेवरेट खाना होता था। ऊंट गाड़ी पर बैठकर गांव के चक्कर लगाना उसे बहुत पसंद था।
बचपन में पेड़ पर चढ़ने में एक्सपर्ट थे सतीश
सतीश के बचपन के दोस्त राजेंद्र सिंह नंबरदार ने बताया कि कौशिक जब गांव आते थे तो हम सभी दिनभर पूरे गांव में घूमा करते थे।गांव में बने बाबा दयाल के जोहड़ के पास जाकर हम पील खाया करते थे। गांव में लगे जाल के पेड़ों पर हमने खूब मौज-मस्ती की है। अभी तो उसका वजन काफी बढ़ गया था। लेकिन बचपन में वह दुबला-पतला ही था और झट से पेड़ पर चढ़ जाया करता था। सतीश जब भी गांव आता, हमें मुंबई आने को कहता। हम हर बार टाल देते। उसकी उन्हें मुंबई घुमाने की इच्छा अधूरी ही रह गई।
गांव के मंदिर में मूर्ति स्थापना कराई
ठाकुर अतरलाल ने बताया कि 2010 में सतीश कौशिक ने ही गांव के राधाकृष्ण मंदिर में मूर्ति की स्थापना करवाई। गांव के जोहड़ की सफाई करवाई। राज्य सरकार के सहयोग से स्टेडियम बनवाया और गांव को ग्रांट दिलवाई।
Published on:
11 Mar 2023 03:28 pm
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