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ईएलएसएस म्यूचुअल फंड के जरिए बचाएं टैक्स

जनवरी का महीना खत्म हो चुका है और अगर आप वेतनभोगी ( salaried person ) हैं तो आपके नियोक्ता जल्द ही (यदि नहीं किया है) आपसे वित्त वर्ष के दौरान टैक्स छूट ( tax exemption) के लिए किए गए निवेश के बारे में जानकारी मांग सकते हैं। ऐसे में ईएलएसएस निवेश ( ELSS investment ) एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है, जो न केवल टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकता है, बल्कि यह रिटर्न के लिहाज से भी शानदार है। वास्तव में यह सभी के लिए है जिनकी आय टैक्स के दायरे में आती है।

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ईएलएसएस म्यूचुअल फंड के जरिए बचाएं टैक्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड के जरिए बचाएं टैक्स

जयपुर। जनवरी का महीना खत्म हो चुका है और अगर आप वेतनभोगी हैं तो आपके नियोक्ता जल्द ही (यदि नहीं किया है) आपसे वित्त वर्ष के दौरान टैक्स छूट के लिए किए गए निवेश के बारे में जानकारी मांग सकते हैं। ऐसे में 80सी सेक्शन के तहत टैक्स छूट का फायदा लेने के लिए आप कई ऐसे निवेश विकल्पों का चयन कर सकते हैं, जहां आप 1,50,000 लाख रुपए तक के निवेश की घोषणा कर इस छूट का लाभ ले सकते हैं। ऐसे में ईएलएसएस निवेश एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है, जो न केवल टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकता है, बल्कि यह रिटर्न के लिहाज से भी शानदार है। वास्तव में यह सभी के लिए है जिनकी आय टैक्स के दायरे में आती है।
कुवेरा के सीईओ गौरव रस्तोगी ने बताया कि ईएलएसएस का मतलब होता है इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम। यह म्यूचुअल फंड स्कीम है और आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत इस निवेश की घोषणा कर टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है। अधिकांश फंड कंपनियां ऐसे स्कीम की पेशकश करती है, जिन्हें टैक्स सेवर या ईएलएसएस स्कीम्स के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है।
ईएलएसएस में निवेश की कुछ अहम विशेषताएं इस प्रकार हैं
1. आप एक वित्त वर्ष में एक या अधिक ईएलएसएस में कोई भी राशि निवेश कर सकते हैं। लेकिन आपका 1,50,000 रुपए तक का निवेश ही आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट के दायरे में आएगा।
2. ईएलएसएस के तहत पूंजी का निवेश इक्विटी बाजारों में किया जाता है, जहां अधिक जोखिम होता है, लेकिन वहां रिटर्न की संभावना भी अधिक होती है।
3. इन स्कीम में निवेश की गई पूंजी का लॉक इन पीरियड तीन सालों का होता है।
4. आप इस स्कीम में एकमुश्त या फिर किसी अन्य म्यूचुअल फंड स्कीम की तरह सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश कर सकते हैं।
5. एलटीसीजी की पेशकश के बाद ईएलएसएस फंड्स पर हासिल होने वाले कैपिटल गेंस पर 10 फीसदी एलटीसीजी टैक्स लगता है, लेकिन लाभ में शुरुआती एक लाख रुपए की रकम टैक्स छूट के दायरे से बाहर होती है। अगर कोई निवेशक 80सी के छूट के लिए योग्य नहीं है तो ऐसे में टैक्स बचाने का तरीका यह है कि एक लाख रुपए से कम फायदे वाली ईएलएसएस यूनिट को बेच देना चाहिए और फिर उस रकम को टैक्स छूट के मकसद से उसी साल के लिए ईएलएसएस या फिर रेग्युलर इक्विटी फंड में फिर से निवेश कर देना चाहिए।
अधिकांश लोग अतीत में टैक्स छूट का लाभ लेने के मकसद से पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) स्कीम में निवेश करते रहे हैं। सरकार की तरफ से गारंटेड रिटर्न के लिहाज से यह शानदार विकल्प रहा है। अतीत में पीपीएफ से मिलने वाला रिटर्न काफी अधिक रहा है, हालांकि अब इसमें गिरावट आई है। इसके अलावा पीपीएफ ईईई टैक्स फ्री है। मतलब निवेश के दौरान, रिटर्न और रकम निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगता है, लेकिन ईएलएसएस स्कीम में भी ऐसा ही है। हालांकि कई मानकों पर ईएलएसएस पीपीएफ के मुकाबले निवेश का ज्यादा बेहतर विकल्प है। ईएलएसएस सीरीज में लिखे गए अगले पोस्ट में हम इस संभावनाओं का विस्तार से जिक्र करेंगे।
इसलिए अब आपको ईएलएसएस से डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। टैक्स सेविंग इनवेस्टमेंट के लिए आपको इस स्कीम को अपनी पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए। जब आप ऐसी योजना में डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करते हैं तो आपका पैसा सीधे स्कीम में जाता है और आपके पैसे की काफी बचत होती है, जबकि अन्य मामलों में आपको कुछ रकम का भुगतान कमीशन के तौर पर करना होता है।