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राजस्थान के बिजली विभाग में 237 करोड़ का घोटाला: हरकत में आई सरकार, दिनभर चला बैठकों का दौर

राजस्थान में बिजली तंत्र सुधारने के नाम पर 237 करोड़ रुपए के घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं।

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बिजली तंत्र सुधारने के नाम पर 237 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में जयपुर डिस्कॉम और उर्जा विभाग के अफसरों की साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने दो माह पहले जो रिपोर्ट सौंपी, उसे दबा दिया गया ताकि अनुबंधित कंपनी आर.सी. एंटरप्राइजेज विद्युत सब स्टेशन का निर्माण पूरा कर ले और भुगतान लेने की हकदार हो जाए। इसके लिए कंपनी प्रतिनिधियों ने उच्चाधिकारियों से रिपोर्ट को आगे भेजने से रुकवा दिया। गंभीर यह है कि भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बावजूद न तो काम रुकवाया गया और न ही रिपोर्ट दबाने वालों पर कोई कार्रवाई की गई।

चल रही गहन जांच, जल्द एक्शन का दावा

डिस्कॉम की तरफ से मीडिया को लिखित बयान भेजा गया, जिसमें दावा किया गया कि इस मामले में गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इन मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजेंगे और मामला भी जल्द दर्ज कराएंगे।

नतीजे का इंतजार

राजस्थान पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार हरकत में आई। उर्जा मंत्री भी सक्रिय हो गए। उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव अलोक, डिस्कॉम सीएमडी आरती डोगरा से वस्तुस्थिति पूछी। इसके बाद खलबली मची और अवकाश होने के बावजूद रविवार को जांच कमेटी के सभी सदस्यों, निदेशक, सचिव व अन्य को विद्युत भवन बुलाया। यहां सीएमडी डोगरा ने कुछ अधिकारियों से जानकारी ली। रिपोर्ट आगे नहीं बढ़ाने को लेकर पूछा, लेकिन एक्शन कुछ नहीं हुआ।

घोटालों की लंबी सूची

33 केवी जीएसएस निर्माण से जुड़ी निविदा मामले में जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन समीक्षा करने का हवाला दे टाला जा रहा है। एक अन्य मामले (टेंडर संया 534 व 535) में भी एसीबी ने तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी हुई है। करीब एक माह पहले जांच कमेटी गठित कर दी गई थी, लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। अब जांच की अवधि एक माह और बढ़ाई है। इसमें डिस्कॉम सीएमडी की अध्यक्षता में जांच होनी है।

किसने और किसके कहने पर जांच रिपोर्ट रोकी, ऐसे सभी जिमेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी। एसीबी को भी रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है। काम और भुगतान रोकने की प्रक्रिया भी होगी।- हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री