
संयुक्त अभिभावक संघ का आरोप- निजी स्कूल नहीं कर रहे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना
संयुक्त अभिभावक संघ ने विजय दशमी पर्व के अवसर पर शिक्षा सहित प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि राज्य सरकार और तमाम नेता हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत पर दिखावटी प्रदर्शन कर रावण का पुतला फूंकते है लेकिन प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में फैली बदहाली उपजे विशाल रावण के पुतलें को कब जलाया जाएगा। प्रदेश के निजी स्कूलों में कोर्ट और कानून की पालना कब होगी।
संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा की 3 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने फीस विवाद पर आदेश दिया था। जिसका संयुक्त अभिभावक संघ सहित प्रदेश के अभिभावकों ने सम्मान किया था, उस आदेश को आज करीबन डेढ़ वर्ष का समय गुजर चुका है लेकिन सरकार और प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना निजी स्कूलों में नहीं करवा पाए हंै।
’वर्ष 2020 के फीस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
प्रदेश विधि मामलात मंत्री एडवोकेट अमित छंगानी ने कहा कि वर्ष 2020 में बड़े स्तर पर निजी स्कूलों की फीस का विवाद उपजा था, पहले 18 दिसंबर 2020 को राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश आया था, जिसके खिलाफ निजी स्कूलों की एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट चली गई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई 2021 को आदेश दिया। जिसमें आदेश दिया गया कि निजी स्कूलों को फीस एक्ट 2016 की पालना निर्धारित करनी होगी, फीस एक्ट से निर्धारित फीस का 85 प्रतिशत फीस अभिभावकों से वसूला जाएगा। आज तक राज्य के 99.99 प्रतिशत स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना की मांग को लेकर 30 जुलाई 2021 को शिक्षा विभाग कार्यालय पर संयुक्त अभिभावक संघ के नेतृत्व में विशाल प्रदर्शन किया गया था। जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने साजिश रचकर अभिभावकों के समूह को तोडऩे की साजिश रचते हुए संघ के 4 पदाधिकारियों सहित 7 अभिभावकों पर रााजकार्य बाधा का झूठा मुकदमा दर्ज करवाया और 4 दिनों तक गिरफ्तार करवाया।
’अभिभावकों की एकमात्र मांग निजी स्कूलों में हो कोर्ट और कानून के आदेश का सम्मान’
प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि संयुक्त अभिभावक संघ ना राज्य सरकार के खिलाफ है ना प्रशासन के खिलाफ है और ना ही किसी निजी स्कूल के खिलाफ है। संयुक्त अभिभावक संघ सहित प्रदेश के 2 करोड़ अभिभावकों की एक मात्र मांग राज्य के निजी स्कूलों में कोर्ट और कानून के आदेश का सम्मान की है।
Published on:
05 Oct 2022 04:32 pm
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