
साइटिका और रीढ़ की समस्या में राहत देता पंचकर्म
स्वस्थ खानपान और सही जीवनशैली के अभाव में कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी से संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई बार यह साइटिका या गंभीर समस्या का रूप ले लेती है। ऐसे में आयुर्वेद में पंचकर्म क्रिया काफी लाभकारी माना गया है।
लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठने से बचें
अचानक से अधिक भार उठा लेना, बहुत ज्यादा व्यायाम करना, लगातार एक ही पोश्चर में बैठे रहना, खेल के दौरान गलत पोश्चर या ऐसे काम करना जिससे कमर और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता हो आदि के कारण रीढ़ की हड्डी में ***** खिसकने या फटने संबंधी समस्या हो सकती है। खानपान की खराब आदतें भी रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। कुछ लोग अपने भोजन में घी या तेल का प्रयोग सीमित मात्रा से भी कम करते हैं। लंबे समय तक इसी तरह का आहार लेने से ***** का लचीलापन कम होने लगता है और ***** फट जाती है।
जब कमर से पैर में बढऩे लगे दर्द
रीढ़ की हड्डी में ***** का खिसक जाना, ***** के फटने से कमर में तेज दर्द और मूवमेंट में परेशानी होती है। ***** से नर्व पर दबाव पडऩे से पैर, गर्दन और हाथ में दर्द एवं खिंचाव, हाथ-पैरों में झनझनाहट, चक्कर आना आदि समस्याएं होने लगती हंै। कमर से पैर में दर्द जाना साइटिका का लक्षण है।
चिकित्सा से दुगने दिनों तक सावधानी रखना जरूरी
रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं में पंचकर्म उपयोगी है। पंचकर्म चिकित्सा की पांच प्रकिया वमन, विरेचन, नस्य, अनुवासन वस्ती, निरूह बस्ति हैं। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या में निरूह बस्ति और अनुवासन बस्ति किया जाता है। पंचकर्म से पहले की जाने वाली तैयार को पूर्वकर्म कहा जाता है। इस दौरान तेल की मालिश और औषधियों का सेक किया जाता है। इसी से लाभ मिल जाता है। 7 से 21 दिन तक पंचकर्म किया जाता है। इसके बाद जितने दिन पंचकर्म लिया है उससे दुगने दिनों तक दिन में सोना, देर तक बैठना, सर्द-गर्म और ज्यादा बोलने आदि से बचें।
डॉ. सर्वेश कुमार सिंह
पंचकर्म विशेषज्ञ, एनआइए, जयपुर
Published on:
22 May 2021 08:51 pm
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