डॉप्लर प्रभाव, घूर्णन, मैक्सवेल का लट्टू, प्लाज्मा अवस्था, यांत्रिकी संचरण तथा गति के आधारभूत नियमों को समझने व उनके प्रैक्टिकल करने में 11 वीं, 12 वीं के छात्रों को पसीने छूट जाते है। सबसे कठिन होता है इन बनाने वाले फॉर्मूले को याद रखना। साइंस के इन नियमों को अब स्टूडेंट्स न सिर्फ आसानी से पढ़ सकेंगे, बल्कि इनकी उपयोगिता के बारे में भी आसानी से जानकारी मिल सकेगी। यह संभव हो सकेगा जगतपुरा स्थित विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी में साइंस में रूचि रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए तैयार किए गए इनोवेशन हब में। इस हब में 30 मॉडल्स हैं, जिसमें स्टूडेंट्स बोर्ड के सिलेबस में काम आने वाले एक्सपेरिमेंट्स को मॉडल्स के रूप में देखकर तथा स्वयं बनाकर समझ सकेंगे। इस हब में किसी भी स्कूल के स्टूडेंट्स एक्सपट्र्स की गाइडेंस में मॉडल्स बनाने आ सकते हैं।
यहाँ स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि टीचर्स भी सीखेंगे साइंस की बारीकियां। यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी के अनुसार पहले चरण में प्रदेश के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूलों के 140 साइंस टीचर्स को 14 से16 जुलाई तक टे्रनिंग दी जाएगी। इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्निक वर्कशॉप में टीचर्स को बताया जाएगा कि अपने स्कूलों में वे इनोवेशन हब कैसे बना सकते हैं। साथ ही साइंस की पढ़ाई में इस हब का क्या फायदा होगा। टीचर्स को मॉडल्स भी तैयार करना सिखाया जाएगा। इस वर्कशॉप के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, राजस्थान सरकार की ओर से भी 50000 रुपए का बजट दिय गया है। स्कूलों में भी हब- जानकारी के अनुसार प्रदेश के साइंस स्कूलों में भी इनोवेशन हब बनाए जाएंगे। इसकी शुरुआत हो चुकी है। स्कूलों के टीचर्स साइंस को आसानी से समझाने के लिए हब तैयार करवाएंगे। इन हब में स्टूडेंट्स को क्रिएटिविटी कॉर्नर दिया जाएगा, जिसमें वे स्किल डवलमेंट के लिए प्रोजेक्ट बनाएंगे।
हब में ये हैं मॉडल्स - असरल दोलित्र, कोणीय संवेग संरक्षण, युग्मित दोलन, बोहर कक्ष का प्रदर्शन, डॉप्लर प्रभाव, चुम्बकों से साम्यावस्था, वक्र पृष्ट का महत्व, कुण्ड नली, लिसाजू आकृतियां, लॉरेन्ज दोलित्र का प्रदर्शन, 1/8 प्रयास से मानव चलित लिफ्ट, मैक्सवेल का लट्टू, स्वयं के भार का मापन, नत-तल पर गति, चुम्बकीय युग्मन वाले दोलित्र, यांत्रिकीय संचरण, प्लाज्मा अवस्था, प्लाज्मा का अनुप्रयोग, घूर्णन-गतिकी, घर्षण बल का न्यूनकरण, रेसिंग-टे्रक, सोलर सांद्रक, पैण्डूलमों की शृंखला, किसी निकाय का कम्पन विश्लेषण और वोरटेक्स का बनना वर्जन भारत सरकार की कौशल विकास योजना के तहत स्कूलों में प्रायोगिक विज्ञान पर जोर दिया जाएगा, ताकि स्टूडेंट्स खुद प्रोजेक्ट बना सकें।
प्रो. (डॉ.) योगेश कुमार विजय, प्रेसिडेंट, विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी बच्चों को थ्योरी पढ़ाने की बजाय उनकी स्किल्स डवलप की जाएगी। आज स्कूलों और कोचिंग संस्थाओं में केवल किताबी ज्ञान पर जोर दिया जा रहा है, जो छात्रों की प्रायोगिक क्षमताओं को कम कर रहा है। इनोवेशन हब में मॉडल्स की मदद से बच्चों को लाइफ में काम आने वाले सामान्य विज्ञान के सिद्धांतों का परिचय कराया जाएगा। यह प्रयास इनकी विज्ञान में रुचि का भी वर्धन करेगा।