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सील मकान खुलवाना है तो देने होंगे पैसे, सरकार ने ही खोला रास्ता

अवैध निर्माण की सील खोलने की नीति लागू

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सील मकान खुलवाना है तो देने होंगे पैसे, सरकार ने ही खोला रास्ता

सील मकान खुलवाना है तो देने होंगे पैसे, सरकार ने ही खोला रास्ता

जयपुर। सरकार ने अवैध निर्माण की सील खोलने के लिए नीति लागू कर दी है। मंत्री शांति धरीवाल की मंजूरी के बाद नगरीय विकास विभाग ने गुरुवार को इसके आदेश जारी कर दिए। अब सील खोलने से पहले नगरीय निकाय निर्माणकर्ता से 50 से 500 रुपए प्रति वर्गफीट शुल्क (धरोहर राशि) लेंगे। साथ में निर्माण हटाने, भूउपयोग परिवर्तन कराने, पट्टा लेने का शपथ पत्र भी लिया जाएगा। इसकी समय सीमा 60 से 120 दिन तक होगी। निर्धारित मियाद में अवैध निर्माण नहीं हटाया तो न केवल धरोहर राशि जब्त करेंगे, बल्कि निर्माण को दोबारा सील किया जाएगा। भूखंडधारी यदि निर्धारित समय में अवैध निर्माण हटा लेता है तो निर्माणकर्ता को धरोहर राशि लौटा दी जाएगी।

सील भवन खोलने का यह होगा आधार...
सील का कारण—खोलने का आधार—धरोहर दर—निर्माण हटाने की समय सीमा
1. बिना स्वीकृति निर्माण : निर्माण स्वीकृत योग्य हो—बिना स्वीकृति बिल्टअप क्षेत्र पर 50 रुपए प्रति वर्गफीट—60 दिन में निर्माण स्वीकृति लेनी होगी
2. स्वीकृति से अधिक निर्माण एवं सेटबैक में निर्माण : अवैध निर्माण जो स्वीकृति योग्य नहीं है और इसे हटाया जाना है—अवैध बिल्टअप क्षेत्र पर 300 रुपए प्रति वर्गफीट— 60 दिन में अवैध निर्माण हटाना
3. स्वीकृत से भिन्न उपयोग : ऐसा हिस्सा जो स्वीकृत योग्य हो— अवैध बिल्टअप क्षेत्र पर 300 रुपए प्रति वर्गफीट—90 दिन में भूउपयोग परिवर्तन जरूरी
4. स्वीकृत से भिन्न उपयोग : ऐसा हिस्सा जो स्वीकृत योग्य नहीं हो और हटाया जाना है—अवैध बिल्टअप क्षेत्र पर 500 रुपए प्रति वर्गफीट—60 दिन में हटाना होगा
5. कृषि भूमि का बिना रूपांतरण निर्माण : — सील किया गया अवैध निर्माण— बिल्टअप क्षेत्र पर डीएलसी का 25 प्रतिशत दर से— 120 दिन में पट्टा लेना

सील खोलने के इन्हें दिए अधिकार
विकास प्राधिकरण- आयुक्त
नगर निगम- निदेशक, स्थानीय निकाय विभाग
नगर परिषद व पालिका- निदेशक, स्थानीय निकाय विभाग
नगर विकास न्यास- सचिव

निर्माण नहीं हटाया तो जब्त होगी राशि
-अवैध निर्माण हटाने, अवैध भूउपयोग बंद करने, पार्किंग एरिया उपलब्ध कराने पर जमा धरोहर राशि में से 90 प्रतिशत राशि लौटाई जाएगी। बाकी 10 प्रतिशत राशि प्रशासनिक शुल्क के रूप में जमा करेंगे।
-यदि अवैध निर्माण नहीं हटाते हैं तो भवन दोबारा सील होगा। साथ ही धरोहर राशि भी जब्त कर ली जाएगी। निकाय अवैध निर्माण ध्वस्त करेंगे, जिसका खर्चा भूखंडधारी से वसूला जाएगा। 30 दिन के भीतर न्यायालय में अभियोजन की कार्यवाही होगी। इसमें जो भी अधिकारी, कर्मचारी कोताही बरतेगा, उसके खिलाफ एक्शन होगा।