
कला कभी पूरी नहीं होती , जुड़ते रहते हैं नए आयाम - डॉ.विद्यासागर.उपाध्याय
जयपुर। कला और साहित्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजस्थान फोरम की मासिक श्रंखला में इस बार वरिष्ठ चित्रकार Dr. Vidyasagar Upadhyay ने अपना कला का सफर साझा किया। इस अवसर पर डॉ. सलेहा गाजी के सवालों ने कार्यक्रम को बहुत दिलचस्प बना दिया।
विद्यासागर ने बताया कि मेरी नजर में अमूर्त कुछ भी नहीं मन के भीतर जो कल्पनाएं होती हैं एक कलाकार उन्हीं को प्रस्तुत कर देता है और अमूर्त को भी मूर्त बना देता हैं। उन्होंने बताया वांगड़ का प्राकृतिक असर हमेशा मेरी कला में साथ रहा। उदयपुर में कला के साथ पला बड़ा हुआ देवगड़ में भी पांच साल गुजारे जहां कई चुनौतियों का सामना किया।बीस साल तक सिर्फ ब्लैक एंड वाइट रंग में ही काम किया। पर अगर कलाकार के मन में कुछ करने की भूख हो तो चुनौतियां का सामना आसानी से किया जा सकता हैं।
विद्यासागर ने कहा कि एक कलाकार का मन अपनी कलात्मक विचारों के साथ नींदों में भी जागता रहता हैं। उन्होंने कहा अपने भीतर जो भी महसूस किया उसे अपने रंगों और रेखाओं के माध्यम से एक रूप दिया। आज तक कभी अपनी कलाकृति को कोई शीर्षक नहीं दिया। कला कभी पूरी नहीं होती उनमें हमेशा नए-नए आयाम जुड़ते रहते हैं।
तकनीक कभी भी कला पर हावी नहीं हो सकती
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक कभी भी कला पर हावी नहीं हो सकती। एक कंप्यूटर कभी भी कलाकार के मन की तरह नहीं सोच सकता। तकनीकी किसी भी कलाकार के लिए खतरा नहीं बल्कि एक आवश्यकता हैं। इस अवसर पर कई गणमान्य कलाकार और साहित्यकार उपस्थित रहे। अंत में राजस्थान फोरम के सदस्य पद्मश्री तिलक गितई, पद्मश्री शाकिर अली,डॉ.मधु भट्ट तैलंग, डॉ नंद भारद्वाज और किरण मंजरी ने डॉक्टर विद्यासागर उपाध्याय को स्मृति चिहृन देकर सम्मानित किया।
Published on:
11 Jan 2023 07:06 pm
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