
Shani Bhagavaan Ki Kripa Kaise Milti Hai
जयपुर।
नवग्रहों में शनि देव न्याय के कारक माने जाते हैं। लोगों को प्राय: उनके नाम पर डराया जाता है जबकि सच यह है कि वे केवल कर्मों के आधार पर ही परिणाम देते हैं। अच्छा कर्म करनेवालों को शनि देव जहां अच्छा फल देते हैं वहीं बुरे कर्म करनेवालों को दंडित करते हैं। चूंकि हम सभी से जाने—अनजाने कई पाप हो ही जाते हैं इसलिए हमें उनके दुष्परिणाम भी शनिदेव के माध्यम से भुगतने ही होेते हैं। जिनकी कुंडली में शनि देव की स्थिति अच्छी होती है उन्हें जीवन में सारे सुख मिलते हैं जबकि शनि की स्थिति अच्छी नहीं होने पर लोगों को दरिद्रता, बीमारी आदि से हमेशा परेशान रहना पडता है। शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा जरूरी है; इसके लिए एक अच्छा अवसर आ रहा है।
7 मार्च को शनिवार है और इस दिन प्रदोष व्रत भी है; इस संयोग को शनि प्रदोष या शनि त्रयोदशी कहा जाता है। इसदिन व्रत और पूजा करने से शनिदेव के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। शनिदेव की शांति और शनि संबंधी दोष दूर करने के लिए इस दिन शनि देव की विधि विधान से पूजा करें। जिन जातकों की शनि की महादशा या अंतरदशा चल रही है, शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रकोप है तो उन्हें शनिवार को पड़ने वाले इस प्रदोष का पूरा लाभ उठाना चाहिए। इस दिन शनिदेव के मूलमंत्र ओम प्रां प्रीं प्रों श: शनिचराएै नम: का कम से कम 108 बार जाप करें। दशरथकृत शनि स्त्रोत का पाठ करें या शनि चालीसा का पाठ करें। इसके साथ ही ओम नम: शिवाय मंत्र का अधिकतम जाप करें।
पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि शाम को जब सूर्य अस्त होता है और रात आनेवाली होती है उस समय को प्रदोष काल कहा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव शिवलिंग में समाए रहते हैं इसीलिए इस समय शिव पूजन का फल जरूर मिलता है। यही समय शनि पूजन के लिए भी सबसे अनुकूल कहा गया है. शनि त्रयोदशी का व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिये भी किया जाता है। शनि प्रदोष पर भगवान शिव की पूजा के बाद शनिदेव की पूजा करना चाहिए।
Published on:
29 Feb 2020 02:38 pm
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