जयपुर। शनि जयंती आज पंचग्रही योग सर्वार्थ सिद्धि और धृति योग में मनाई जा रही है। शनि मंदिरों में सूर्य पुत्र भगवान शनि को फूल बंगले में विराजमान किया जा रहा है। सुबह से ही शहर के शनि मंदिरों में भक्तों की कतारें लग रही हैं। शनि जयंती के तहत शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती को दूर करने के लिए शनि मंदिरों में तेलाभिषेक सहित अन्य अनुष्ठान करने से किए जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं.हनुमान प्रसाद दाधीच के मुताबिक नवग्रहों में शनिदेव को विशेष दर्जा प्राप्त है, यह सेवा और कर्मकारक हैं। शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर हुआ था। यह दिन सर्वकष्ट निवारक रहेगा। जिस राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती अथवा शनि की ढैया का बुरा प्रभाव है और जिनका राहु व केतु खराब है, कालसर्प योग व पितृदोष हैं। ऐसे जातक शनि मंदिरों में आज के दिन तेल अभिषेक करते हैं तो शनि से जनित सभी दोषों से छुटकारा मिलता है।