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इस बार नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी, जानिए क्या रहेगा फल…

shardiya navratri 2022: इस बार मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन एवं प्रस्थान ‘गज’ (हाथी ) पर है, जो अच्छी बारिश, खुशहाली और समृद्धि का संकेत है। परम शक्ति मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्र को सर्वोत्तम समय माना जाता हैं।

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इस बार नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी, जानिए क्या रहेगा फल...

देवेंद्र सिंह / जयपुर. शारदीय नवरात्र इस साल 26 सितंबर से प्रारम्भ हो रहे हैं। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के है। वहीं समापन 5 अक्टूबर को विजयादशमी पर होगा। इस बार मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन एवं प्रस्थान ‘गज’ (हाथी ) पर है, जो अच्छी बारिश, खुशहाली और समृद्धि का संकेत है। परम शक्ति मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्र को सर्वोत्तम समय माना जाता हैं। इसमें भी शारदीय नवरात्र का सबसे ज्यादा महत्व है। देश में ही नहीं विदेशों में भी रहने वाले भारतीय इस व्रत को श्रद्धा के साथ रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने भी शारदीय नवरात्र में देवी को प्रसन्न कर विजयादशमी के दिन रावण का संहार किया था। श्रद्धा विश्वास से ऊर्जा और शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना से आज भी भक्त शांति और आत्म बल प्राप्त करते हैं।

आगमन व प्रस्थान दोनों ही शुभ

शारदीय नवरात्रा प्रारंभ होने के पूर्व भक्तों में यह जिज्ञासा बनीं रहती हैं कि मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ किस वाहन पर सवार होकर आएगी ओर किस वाहन से लौटेंगी। मां दुर्गा के आगमन एवं प्रस्थान से ही आगामी वर्ष के अच्छे बुरे फल का अंदाज लगाया जा सकता हैं। श्री शिव शक्तियोग पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद महाराज ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रा कलश स्थापना अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 26 सितंबर को सोमवार होने से मां दुर्गा का आगमन ‘हाथी’ पर हो रहा है। जिसका फल होता हैं अत्यधिक वर्षा के साथ पानी में बढ़ोत्तरी। वहीं विजयादशमी 5 अक्टूबर बुधवार को हैं। ऐसे में मां दुर्गा ‘हाथी’ पर सवार होकर ही लौटेंगी। जिसका फल भी अत्यधिक वर्षा के साथ पानी की बढ़ोतरी। मां का आगमन एवं प्रस्थान दोनों ही शुभ संकेत देने वाले है। ग्रह योग से इस बार शारदीय नवरात्र में वर्षा होने की प्रबल संभावना बन रही है।

वार से जुड़ी मां की सवारी

ज्योतिषाचार्य पं. सुरेश शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में मां का आगमन व प्रस्थान की सवारी वार से जुड़ी हुई है। यदि नवरात्र रविवार या सोमवार से प्रारंभ होते हैं तो मां दुर्गा हाथी पर, शनिवार या मंगलवार को घोड़ा पर, गुरुवार या शुक्रवार को डोला पर, और बुधवार को शुरू होने पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं।

फल: मां का गज ( हाथी) पर आना पानी की बढ़ोतरी, घोड़ा पर आना युद्ध की आशंका, नौका पर आने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। डोली पर आने से आक्रांत रोग और मृत्यु का भय बना रहता हैं।

प्रस्थान:

विजयादशमी रविवार या सोमवार को होती हैं तो मां दुर्गा भैंसा पर, शनिवार या मंगलवार को मुर्गा पर, बुधवार या शुक्रवार को गज पर एवं गुरुवार को नर वाहन पर प्रस्थान करती हैं।

फल:

मां का भैंसा पर प्रस्थान करना शोक का माहौल मुर्गा पर जन मानस में विकलता, गज पर शुभ वृष्टि, नरवाहन पर शुभ सौख्य होती हैं। कुल मिलाकर इस वर्ष मां भगवती की कृपा भक्तों पर बरसेगी। भक्त अपनी श्रद्धा, निष्ठा एवं भक्ति से मां की आराधना करेंगे उनका कल्याण होगा।

नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है और हर दिन मां के एक रूप को समर्पित है।

कब किसकी पूजा

26 सितंबर: प्रतिपदा, मां शैलपुत्री पूजा

27 सितंबर: द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी पूजा

28 सितंबर: तृतीया , मां चंद्रघंटा पूजा

29 सितंबर: चतुर्थी , मां कुष्मांडा पूजा, विनायक चतुर्थी, उपांग ललिता व्रत

30 सितंबर : पंचमी, मां स्कंदमाता पूजा

1 अक्टूबर : षष्ठी, माता कात्यायनी पूजा

2 अक्टूबर : सप्तमी, मां कालरात्रि पूजा

3 अक्टूबर: दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा, महानवमी

4 अक्टूबर: महानवमी, शारदीय नवरात्रि का पारण

5 अक्टूबर : दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी (दशहरा)