
She News - मां के शौक से बनाई खुद की पहचान, इंडिया बुक ऑफ रेकॉर्ड में किया नाम दर्ज
जयपुर। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। ये लाइनें शहर की कत्थक और लोकनृत्य कलाकार मिताली घोष पर सटीक बैठती हैं। उन्होंने अपना नाम इंडिया बुक आफ रेकॉर्ड में एम्बेसडर ऑफ पेट्रियटिज्म नाम से दर्ज कराया है। उन्हें डॉक्टर ए.पी.जे अब्दुल कलाम सम्मान एवं मोस्ट इंस्पाइरिंग वीमन ऑफ इंडिया के खिताब के साथ कई अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड और सम्मान भी मिल चुके हैं।
10 साल की उम्र में ही सीखा
मिताली घोष बताती हैं कि जब वह छोटी थीं, तब उनकी मां बहन को डांस सीखने के लिए भेजती थीं। उस समय उनकी डांस में रुचि नहीं थी, लेकिन समय के साथ सोच बदली और भरतनाट्यम सीखने का इंट्रेस्ट जागा, लेकिन उस समय जयपुर में अच्छा सिखाने वाला नहीं था। तब मां ने गुरु गिरधारी महाराज के पास भेजा। उस समय उनकी उम्र 10 साल थी।
पहली आइडियल हैं मां
वह कहती हैं कि उनकी मां और पति का सपोर्ट रहा, मां को डांस का शौक था, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला फिर मैंने उनके सपनों की जीना शुरू किया। शादी के बाद शौक कहीं गुम सा हो गया था और डिप्रेशन में आ गई थीं। तब पति ने सपोर्ट किया और अपनी जॉब छोडकऱ उन्हें जयपुर वापस लेकर आ गए, जिससेवह अपने शौक को जारी रख सकें।
45 लोगों को दे रही ट्रेनिंग
मिताली घोष कहती हैं जिस तरह से लोगों के लिए खाना जरूरी होता है, उसी तरह मेरे लिए नृत्य है। वह प्रतिदिन 7 से 8 घंटे नृत्य करती हैंं और 3 साल से लेकर 62 साल तक के लोगों को टे्रनिंग दे रही हैं।
Published on:
02 Mar 2024 09:47 am
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