17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

She News – एजुकेशन सिस्टम में दिखी खामी, तो शुरू कर दिया स्टार्टअप

नेहा मुजावदिया जो आठवीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ी और अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए परेशानियों का सामना किया। फिर एक कोचिंग में उच्च पद हासिल किया लेकिन जब एजुकेशन सिस्टम में खामी नजर आई, तो अपना खुद का एडटेक स्टार्टअप शुरू कर अपनी नई और अलग पहचान बनाई।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

Mar 02, 2024

She News - एजुकेशन सिस्टम में दिखी खामी, तो शुरू कर दिया स्टार्टअप

She News - एजुकेशन सिस्टम में दिखी खामी, तो शुरू कर दिया स्टार्टअप

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव नलखेड़ा की नेहा मुजावदिया जो आठवीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ी और अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए परेशानियों का सामना किया। फिर इंदौर की एक कोचिंग में उच्च पद हासिल किया लेकिन जब एजुकेशन सिस्टम में खामी नजर आई, तो अपना खुद का एडटेक स्टार्टअप शुरू कर अपनी नई और अलग पहचान बनाई। नेहा कहती हैं कि मैं जिस गांव से हूं, वहां लड़कियों को 8वीं कक्षा से ज्यादा पढऩे ही नहीं दिया जाता। यह मुझे बिलकुल पसंद नहीं था और अपने दम पर कुछ करना था। जब मैंने अपने घर पर आगे भी पढऩे की इच्छा जाहिर की, तो इंंदौर से एक साल का कोर्स करने की इजाजत मिल गई और यहीं से मेरी जिंदगी ने ले लिया यू टर्न। जब वह उच्च शिक्षा के लिए इंदौर आई, तब देखा कि रिसोर्सेज तो थे, लेकिन क्वॉलिटी एजुकेशन गायब थी। इसी को लेकर 4 साल रिसर्च की। जिसमें सभी विषय के अलग-अलग छात्रों को लिया और जाना कि उनको किस विषय में किस तरह की परेशानी आ रही है।

... और घर-घर पढ़ाकर की शुरुआत
नेहा ने बताया कि 10 से 15 टीचर्स को अपने साथ लेकर उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया था। शुरुआत घर-घर पढ़ाने से हुई थी। वह खुद इंग्लिश की क्लास लिया करती थीं, क्योंकि उन्हें पता था कि गांव के बच्चों को किस तरह समझाना है। फिलहाल हिंदी और इंग्लिश के अलावा कई अन्य भाषाओं में क्लास ली जा रही है।

विदेश में भी दे रहीं सुविधा
नेहा ने बताया कि स्टार्टअप शुरू करने के बाद गांव में बदलाव आया। लोगों की सोच बदली और वह अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए आगे आ रहे हैं। इतना ही नहीं इस ऑनलाइन क्लास में विदेशी स्टूडेंट्स भी शामिल होते हैं। क्लास से प्राप्त होने वाली आय को ग्रामीणों की शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है।