
अरविन्द सिंह शक्तावत / जयपुर। राज्य सरकार ने भले ही भाजपा की महापौर सौम्या गुर्जर को हटा दिया हो, लेकिन एक नई रणनीति के तहत सोमवार रात सरकार ने भाजपा की ही एक पार्षद शील धाभाई को ही कार्यवाहक महापौर बना दिया। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस निर्णय को कोर्ट में अपने केस को मजबूती के रूप में देख रही है। इसके साथ ही उन कयासों पर भी विराम लग गया है, जिसमें यह चर्चाएं हो रही थी कि कांग्रेसी पार्षद को कार्यवाहक महापौर बनाया जा सकता है।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस निर्णय से राज्य सरकार पर यह आरोप नहीं लगेगा कि जानबूझकर सौम्या गुर्जर को महापौर पद से हटाया गया है। सरकार यह कहने की मजबूत स्थिति में हो गई है कि भले ही भाजपा के महापौर को हटाया है, लेकिन सिर्फ शिकायतों के आधार पर ही हटाया है। इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं है। इसलिए भाजपा की ही पार्षद को चार्ज दे दिया गया, क्यों कि बोर्ड में बहुमत भाजपा का ही है।
सरकार ने सौम्या गुर्जर के हाईकोर्ट जाने से पहले ही केविएट दायर कर दी है। यदि सौम्या गुर्जर के केस में सुनवाई होती है तो सरकार के वकील यह कहने की स्थिति में होंगे कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित नहीं है। यह कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई है और भाजपा का बोर्ड है तो कार्यवाहक महापौर भाजपा का ही बनाया गया है।
सामाजिक संतुलन भी बरकरार
सौम्या गुर्जर समाज से आती हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक संतुलन को बरकरार रखते हुए कार्यवाहक महापौर का पद भी शील धाबाई को दिया है। धाबाई भी गुर्जर हैं।
भाजपा के लिए पशोपेश की स्थिति
इस मामले को लेकर भाजपा सोमवार सुबह से ही आंदोलन कर रही थी। राज्य सरकार के खिलाफ जमकर बयानबाजी की जा रही थी। अब पार्टी के सामने भी यह पशोपेश की स्थिति हो जाएगी कि वे नए महापौर के चयन का कैसे विरोध करेगी, क्योंकि शील धाबाई भी भाजपा की ही नेता है। पार्टी को अब आंदोलन की रणनीति में संभवत: थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।
Published on:
07 Jun 2021 10:36 pm
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