
जयपुर । चैत्र कृष्ण अष्टमी शुक्रवार को शीतलाष्टमी (बास्योड़ा) का पर्व विभिन्न योग संयोगों में मनाया जाएगा। इससे पूर्व गुरुवार रांधा पुआ पर विभिन्न पकवान बनाए जा रहे हैं। इसके लिए बाजारों में मिट्टी के बर्तन, सिकोरे और अन्य पूजन सामग्री खरीदी महिलाओं की ओर से की।
शीतलाष्टमी को घरों में चूल्हे नहीं जलेंगे। महिलाएं 16 श्रृंगार कर माता की पूजा अर्चना कर विशेष पकवानों का भोग लगाकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करेगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहों के के स्व और उच्च राशि में होनेे के साथ ही शुक्रवार को की जाने वाली माता की आराधना विशेष फलदायी रहेगी।
पकवानों की महक से महकेंगे घर
आज राबड़ी, कड़ी, पकौड़ी, बेसन की चक्की, पुएं, पूड़ी, बाजरे की रोटी और विशेष सब्जी बनाई जा रही। महिलाएं तड़के गीत गाते हुए पथवारी पूजेंगी और शीतला माता के मंदिरों में पकवानों का भोग लगाएगी। नवविवाहिताएं विशेष तौर पर पकवान (कंडवारा) लेकर मंदिर जाएगी। चाकसू स्थित शील की डूंगरी स्थित शीतला माता के मंदिर में मेला भरेगा। आज मंदिर में सभी तै यारियों को अंतिम रूप दिया गया। दिनभर जयपुर समेत अन्य जगहों से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचेगे।
बीमारियों से मुक्ति की जाएगी कामना
संवत्सर 2078 के अंतिम पखवाड़े में लोकपर्व शीतलाष्टमी मनाया जाएगा। मान्याताओं के मुताबिक एक दिन पूर्व तैयार पकवानों के बनाने के बाद व्रत में ठंडा भोजन माता को अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में इसका सेवन किया जाएगा। चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि 24 मार्च को मध्यरात्रि 12:10 मिनट पर शुरू होगी, जो 25 मार्च को रात 10:04 मिनट तक रहेगी। शीतला माता को ठंडा भोजन अर्पित कर चेचक आदि बीमारियों से परिवार को बचाने की प्रार्थना की जाएगी।
Updated on:
24 Mar 2022 11:00 am
Published on:
24 Mar 2022 10:59 am
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