शिक्षाकर्मी बोर्ड (Shiksha Karmi Board) के तहत कार्यरत शिक्षाकर्मियों की सेवाएं (Service) अब शिक्षा विभाग (Education Department) में ली जाएंगी। निदेशालय ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं, जिसके मुताबिक इन कार्मिकों को अब संविदा पर स्कूलों में नियुक्ति दी जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक जेएन मीणा (District Education Officer Initial JN Meena) ने बताया कि वरिष्ठतम शिक्षाकर्मी, वरिष्ठ शिक्षाकर्मी और सामान्य शिक्षाकर्मियों को पांच साल के लिए संविदा के आधार पर विद्यालय पंचायत सहायक के रूप में नियुक्ति दी जाएगी।
क्या है शिक्षाकर्मी बोर्ड
प्रदेश में शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए राजस्थान शिक्षाकर्मी परियोजना का प्रारम्भ सन् 1984 में निदेशालय प्रौढ़ शिक्षा जिसे वर्तमान में निदेशालय साक्षरता एंव सतत शिक्षा कहा जाता है के प्रशासनिक नियंत्रण में पंचायत समिति किशनगढ़ और दूदू में प्रायोगिक तौर पर प्रारम्भ किया गया था जिसके परिणाम अच्छे आने पर वर्ष 1987 में शिक्षाकर्मी परियोजना के संचालन के लिए अलग से राजस्थान शिक्षाकर्मी बोर्ड का गठन किया गया। प्रारम्भ में शिक्षाकर्मी परियोजना में राज्य के दूरस्थ और समस्याग्रस्त राजकीय विद्यालयों को अधिग्रहण कर उसमें शिक्षाकर्मी योजना के तहत स्थानीय गांव के शिक्षित युवक-युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें शिक्षाकर्मी के पद पर समाज सेवा करने की स्वीकृति प्रदान की जाती थी। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका चयन होता था। वर्ष 1987 से वर्ष 30 जून 2005 तक शिक्षाकर्मी परियोजना का संचालन विदेशी सहायता ओर राजस्थान सरकार से प्राप्त अनुदान से हो रहा था। जुलाई 2005 के बाद से लगातार सरकार के गैर आयोजना मद से इसके लिए बजट उपलब्ध करवाया जा रहा था।
गत वर्ष दिसंबर में किया था भंग
1984 में गठित किए गए इस बोर्ड को सरकार ने गत वर्ष दिसंबर में भंग कर दिया था। शिक्षाकर्मी बोर्ड की अधिशाषी बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया था, जिसकी पालना में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी किए थे। निदेशालय की ओर से जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक शिक्षाकर्मी बोर्ड को भंग कर उसे राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद में समायोजित करने का निर्णय लिया गया गया था और बोर्ड में सृजित सभी पदों को भी समाप्त कर दिया गया था।