
Shrikrishna Puja Ka Mahatva
जयपुर. यूं तो हर तिथि का अपना महत्व है पर इनमें द्वादशी तिथि का कुछ अलग ही स्थान है. शास्त्रों में इस तिथि का धार्मिक नजरिए से अत्यधिक महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर श्रीकृष्ण की उपासना से सभी मनोरथ पूरे होते हैं। वैसे द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है लेकिन उनके ही अवतार श्रीकृष्ण का व्रत फलदायी होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि महाभारत में इस व्रत का वर्णन किया गया है। खुद भगवान श्रीकृष्ण नें ही द्वादशी व्रत का महत्व बताया था। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि, द्वादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ और कल्याणकारी है। इस दिन जो मेरी तीनों समय आराधना करेगा वह मेरी कृपा प्राप्त करेगा। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की द्वादशी सहित उन्होंने अमावस्या, पूर्णिमा और श्रवण-नक्षत्र को विशेष प्रिय तिथि बताईं।
द्वादशी पर श्रीधर पूजा का महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि खास बात यह है कि अलग—अलग माह की द्वादशी तिथि पर श्रीकृष्ण की अलग—अलग नामों से उपासना की जाती है। श्रीकृष्ण की अलग—अलग नामों से की जानेवाली पूजा का फल भी अलग—अलग मिलता है। सावन मास की द्वादशी तिथि पर श्रीकृष्ण की श्रीधर नाम से पूजा की जाती है। इस तिथि पर उपवास रखकर श्रीधर की पूजा करने पर पंचयज्ञों का फल मिलता है।
Published on:
14 Jul 2020 08:27 pm
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