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एसआई भर्ती पर भजनलाल सरकार ने ले लिया ये बड़ा फैसला, अब 7 जुलाई को हाईकोर्ट लेगा अंतिम निर्णय

राज्य सरकार ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिश के आधार पर पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती को रद्द नहीं करने का निर्णय लिया। अब हाईकोर्ट इस भर्ती के भविष्य के बारे में अंतिम निर्णय करेगा।

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High Court

फाइल फोटो

जयपुर। राज्य सरकार ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिश के आधार पर पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती को रद्द नहीं करने का निर्णय लिया। अब हाईकोर्ट इस भर्ती के भविष्य के बारे में अंतिम निर्णय करेगा। कोर्ट ने शपथ पत्र के साथ पेश सरकार के निर्णय को रिकॉर्ड पर लेते हुए मंगलवार को इस मामले पर अंतिम बहस के लिए सुनवाई 7 जुलाई तक टाल दी।

न्यायाधीश समीर जैन ने भर्ती रद्द करवाने के लिए कैलाश चन्द्र शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने 28 जून को पेपरलीक मामले की जांच कर रही पुलिस की विशेष टीम (एसआईटी), कार्मिक, गृह व सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट्स का अध्ययन किया, जिसके आधार पर भर्ती रद्द नहीं करने की सिफारिश की। अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने बताया कि उपसमिति ने भर्ती को लेकर 4 सिफारिश की हैं, जिसमें इस मामले में एसआईटी जांच जारी रखने और अब तक पकड़े गए या पकड़े जाने वाले चयनित अभ्यर्थियों की सेवा समाप्त कर उन्हें भावी भर्तियों से डीबार करना भी शामिल है।

इसके अलावा उपसमिति ने यह भी कहा कि भर्ती रद्द करने का निर्णय करना अभी प्री मैच्योर होगा, वहीं आगामी भर्ती में इस एसआई भर्ती में शामिल हुए अभ्यर्थियों को आयु में छूट दी जाए। उधर, चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर व अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि उपसमिति ने भर्ती रद्द होने से निर्दोष अभ्यर्थियों के साथ कुठारघात होने की बात कही है।

भर्ती रद्द होने से कुछ लोगों की गलती का परिणाम सभी अभ्यर्थियों को भुगतना होगा। साथ ही, कहा कि याचिका में एसआईटी सहित सरकार की पुरानी रिपोर्ट्स के आधार पर भर्ती को चुनौती दी, लेकिन अब नई रिपोर्ट आ जाने के कारण याचिका को सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया जाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेजर आर पी सिंह व अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने कहा कि इस मामले में सरकार अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है। पहले जिस उपसमिति ने भर्ती रद्द करने की सिफारिश की, अब वही भर्ती में गड़बड़ी को संरक्षण दे रही है। जब एक ही उपसमिति की अलग-अलग सिफारिश आई हैं तो हाईकोर्ट को मामले की न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार है।

कोर्ट ने सरकार के शपथ पत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अगली तारीख तक जो कोई भी पक्षकार इस मामले में पक्ष रखना चाहे, वह पक्ष रख सकते हैं। अब कोर्ट इस मामले पर सात जुलाई को आगे सुनवाई करेगा।