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जयपुर की संस्कृति और संगीत प्रेमियों से प्रभावित हुए गायक पाण्डेय, बोले : यहां के लोग बेहद प्यारे

उन्होंने कहा कि यह शहर और यहाँ के लोग बेहद प्यारे हैं। जल्द ही मैं अपने नए प्रोजेक्ट्स के साथ दर्शकों के सामने आऊँगा।

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जयपुर। भोजपुरी गायक और संगीतकार आलोक पाण्डेय गोपाल जयपुर आए। उन्होंने बिड़ला मंदिर में दर्शन किए और शहर की खूबसूरती की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह शहर और यहाँ के लोग बेहद प्यारे हैं। जल्द ही मैं अपने नए प्रोजेक्ट्स के साथ दर्शकों के सामने आऊँगा।

आलोक पाण्डेय गोपाल ने कहा कि उनका मशहूर गाना "जग में बिना केहू सहाई ना होई, केहू केतनो दुलारी बाकी माई ना होई" न सिर्फ भोजपुरी संगीत प्रेमियों बल्कि हर भावुक हृदय को छू जाता है। इस गीत की यात्रा 2004 में बिहार के कवि सम्मेलन से शुरू हुई और 2009 में सुरसंग्राम के मंच पर जब यह गाया गया तो मनोज तिवारी, मालिनी अवस्थी और रवि किशन जैसे दिग्गज भी भावुक हो गए।

यह गाना संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर बन गया। आलोक पाण्डेय गोपाल ने कहा कि करोड़ों दर्शकों तक पहुंचने वाला ये गाना जिसे कई अन्य कलाकारों ने भी अपने आवाज में इस गाने को गया है। आज भी यह गीत स्टेज शो, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में गाया जाता है। हर बार जब यह गाना बजता है, तो लोग अपनी माँ को याद किए बिना नहीं रह पाते। जयपुर यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि यहाँ की संस्कृति और संगीत प्रेमियों की भावनाएँ उनके लिए खास है।।