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आठ वर्षीय मासूम की बलात्कार के बाद निर्मम हत्या, कोर्ट ने अपराधी को दी फांसी की सजा

सिरोही के पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

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जयपुर। सिरोही के पोक्सो कोर्ट ने ठीक एक साल पहले आठ वर्षीया बालिका से बलात्कर के बाद उसका गला दबाकर मौत के घाट उतारने के मामले में फैसला देते दोषी अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला कोर्ट के विशिष्ठ न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने सोमवार को सुनाया। मामले में राज्य की ओर से विशिष्ठ लोक अभियोजक प्रकाश धवल ने पैरवी की।

अभियोजन के मुताबिक पिछले साल 26 नवम्बर को जिले के अनादरा थानान्तर्गत निवासी जुर्म की शिकार बालिका के पिता ने पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया कि 25 नवम्बर की अपराह्न उसकी आठ वर्षीया पुत्री अपने दस वर्षीय सगे भाई व कौटुम्बिक भाई के साथ बरसाती नाले पर नहाने गई थी। करीब तीन-चार घंटे बाद शाम को बालिका के दोनों भाई घर लौटे। सगे भाई ने बताया कि जब वे तीनों नाले में स्नान कर रहे थे, तब उपला गोलिया (तेलपीखेड़ा) निवासी नोकाराम उर्फ भारमाराम भी वहां आया और उसकी बहन को पकड़ लिया और उन दोनों भाइयों को धमका कर भगा दिया। किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। तब वे छुपते-छुपाते घर लौटे। डर के मारे काफी सहमे हुए थे।

तब वह (बालिका का पिता) अन्य परिवारजनों के साथ बेटी की खोज में नाले की ओर निकला। अंधेरा हो चुका होने से टॉर्च की रोशनी में देखा तो वहां उसकी नाबालिग पुत्री निर्वस्त्र व अचेत अवस्था में पड़ी मिली। देखा तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी थी। शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे और पैरों पर खून लगा हुआ था। रिपोर्ट में आरोपी नोकाराम उर्फ भारमाराम गरासिया पर बालिका से दुष्कर्म करने के बाद गला घोटकर हत्या करने का आरोप लगाया।

रिपोर्ट पर पुलिस ने आईपीसी के तहत बलात्कार व जघन्य हत्या के जुर्म के साथ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई। गवाहों के बयान व सुनवाई के बाद विशिष्ठ न्यायालय के विशिष्ठ न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने अभियुक्त नोकाराम उर्फ भारमाराम पुत्र मालाराम निवासी उपला गोलिया (तेलपीखेड़ा) को पोक्सो एक्ट और आईपीसी की धारा-302 के अपराध में दोषसिद्धि पर मृत्युदंड की सजा सुनाई।