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‘बर्फीले तूफान ने उड़ा दिए होश, 6 फीट तक जमी थी बर्फ, सेना को देखा तो जागी उम्मीद’

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snowfall

जयपुर। लेह लद्दाख से मनाली लौटते समय सारचु में बर्फबारी शुरू हुई, जो केलांग में तूफान की तरह होने लगी। बस यहां से बड़ी मुश्किल से करीब सात-आठ किलोमीटर दूर सिसु पहुंचे और एक रेस्त्रां में जगह मिल गई तो वहां ठहर गए। लेकिन बर्फबारी इतनी हो रही थी कि तीन दिन तक रुकने का नाम ही नहीं लिया। सड़क के आसपास करीब छह-छह फीट बर्फ जम गई। संचार साधन ठप हो गए।

बिजली गुल हो चुकी थी। खाने को थोड़ा-थोड़ा दिया जा रहा था। सबको यही लग रहा था, ना जाने कब बर्फबारी रुकेगी। इसी बीच मंगलवार सुबह बर्फ को काटते हुए सेना के जवान हमारे पास पहुंचे तो उम्मीद की नई किरण नजर आई। लेह लद्दाख में बर्फीले तूफान के कारण चार दिन लापता रहे जयपुर के छह डॉक्टरों ने कुछ इस तरह आपबीती बयां की।

जयपुर निवासी डॉ. प्रदीप ने बताया कि 21 सितम्बर को तूफान में फंसे थे। सेना के जवानों ने 24 सितम्बर को रेस्क्यू किया। उनके साथ करीब आठ किमी बर्फ पर चलते हुए लाहौल-मनाली को जोडऩे वाली सुरंग के मुहाने पर पहुंचे। यहां से सेना के वाहनों से 24 सितम्बर की शाम करीब साढ़े सात बजे मनाली पहुंचे, तब सभी ने राहत की सांस ली। बर्फबारी से सिसु में करीब 850 लोग अटक गए थे। यहां रेस्त्रां अधिक नहीं थे, लिहाजा स्थानीय लोगों ने पर्यटकों को अपने घरों में शरण दी। यहां तक कि सिसु में स्थानीय लोगों के पास जो भोजन सामग्री थी, उसमें से थोड़ा-थोड़ा भोजन सभी को दिया जाता था।

बीएसएनएल की लाइन में भी फॉल्ट
डॉ. क्षितिज ने बताया कि क्षेत्र की बिजली काट दी गई थी। किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं लग रहा था। वहां एकमात्र बीएसएनएल की लाइन थी, वह भी फॉल्ट हो गई। इसके चलते सिसु का पूरी तरह से संपर्क टूट गया। जहां नजर जाए वहां बर्फबारी और पहाड़ ही दिखे, सड़क व घरों पर बर्फ ही बर्फ नजर आए। स्थानीय लोग और पर्यटक एक दूसरे को ढाढस बंधा रहे थे।

सकुशल बात होने पर पिता लौटे काम पर
जयपुर से 14 सितम्बर को डॉ. क्षितिज, डॉ. प्रदीप, डॉ. अभिषेक, डॉ. साहिल, डॉ. नीरज और डॉ. विश्वास लेह लद्दाख के लिए निकले थे। 21 को संपर्क टूट गया था। लेह लद्दाख में बर्फबारी व संपर्क टूटने से सभी के परिजन डर गए। निर्माण नगर निवासी क्षितिज के पिता हेमेन्द्र भारद्वाज भिवाड़ी से दफ्तर से अवकाश ले जयपुर आ गए थे। अब बेटे से बात होने पर भिवाड़ी लौटे गए।

चार दिन तक दिन-रात बेटे की तलाश में और किसी तरह कोई खोज-खबर सुनने के लिए इधर-उधर भटकते रहे। बेटे से मंगलवार रात को बात होने के बाद उन्हें राहत मिली। बेटे के गुरुवार तक जयपुर आने की कहने पर हेमेन्द्र बुधवार को भिवाड़ी काम पर लौट गए।