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स्किल्ड युवाओ की डिग्रियों का बना रहे मजाक, जीरो या शर्मनाक मानदेय पर काम करवा रही “सरकार”

कैसे तो जीएं और कैमे काम करें...परिवार चलाने जितना भी इंटर्न को मानदेय नहीं बेरोजगारी भत्ता भी 4 हजार, पर इन्हें या तो कुछ नहीं मिलता, या दिए जा रहे 500 या एक-दो हजार रुपए मासिक

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जयपुर

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Vikas Jain

Dec 19, 2022

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विकास जैन

जयपुर। कोई भी प्रोफेशनल डिग्री हासिल करने के बाद वह युवा और उसका पूरा परिवार इस पर गर्व महसूस करता है। लाखों रुपए पढ़ाई पर खर्च करने के बाद हासिल की गई इन डिग्रियों से उन्हें लगता है कि अब उनके सपने पूरे होंगे। लेकिन युवाओं और उनके परिवार के सपने सरकार और निजी क्षेत्र की मनमानी के कारण चूर हो रहे हैं। राज्य सरकार जहां बेरोजगारी भत्ते के तहत भी 4 हजार रुपए मासिक देती है, वहीं चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण महकमें में नर्सिंग, फिजियोथैरेपी, तकनीशियन की डिग्री लेने वाले युवाओं से भी जीरो मानदेय या महज 500 से एक-दो हजार रुपए मासिक में भी काम करवाया जा रहा है।

निजी क्षेत्र तो स्किल्ड युवाओं की दक्षता बढ़ाने के नाम पर वरिष्ठ अधिकारियों के हिस्से का भी पूरा काम इनसे करवा रहा है। कहीं-कहीं तो जीरो या न्यूनतम भुगतान के बावजूद इनसे ओवरटाइम तक करवाया जाता है। राजस्थान में फिजिथैरेपिस्टों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इनकी न तो काउंसिल है और न ही इनके मानदेय तय हैं। इसका फायदा कुछ सीनियर फिजियोथेरपिस्ट उठा रहे हैं और अपने हिस्से का पूरा काम इनसे बिना पैसे या न्यूनतम भुगतान के बदले करवा रहे हैं। अपनी पढ़ाई में लाखों रुपए खर्च करने और कई साल लगाने के बाद इन्हें परिवार चलाने लायक भी मानदेय और वेतन नहीं दिए जा रहे। नर्सिंग में इंटर्नशिप के दौरान सरकारी क्षेत्र में मात्र 500 से 1 हजार रुपए मासिक का मानदेय दिया जा रहा है।

यह कैसा मजाक : वेतन...मानदेय ऐसे कि शर्म आ जाए...

- निजी अस्पतालों में हेल्थ वॉरियर्स को अलग-अलग मानदेय दिया जाता है, जो औसतन 8 हजार है। सरकार खुद संविदा पर रखने वाले नर्सिंग कर्मियों को शुरूआत में मात्र 5 से 12 हजार रुपए का मासिक वेतन थमा रही है।
- एनएचएम के नर्सिंग संवर्ग में एएनएम, जीएनएम, लैब टेक्टिनिशियन, अन्य तकनीशियन महज 7900 रुपए में प्रतिमाह कार्य कर रहे है। इसमें भी 12 प्रतिशत की कटौती होती है
- पैरामेडिकल स्टाफ को भी इंटर्नशिप में कोई पैसा नहीं मिलता
- निजी अस्पताल में नर्सिंग इंटर्नशिप का भुगतान नहीं होता
- एमबीबीएस इंटर्नशिप में सरकारी क्षेत्र में करीब 18 हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है
- राजकीय फिजियोथैरेपी कॉलेज के विद्यार्थियों को इंटर्नशिप का मानदेय नहीं मिलता
- निजी फिजियोथैरेपी कॉलेज के विद्यार्थी पैसे देकर इंटर्नशिप करते हैं
- सीनियर डॉक्टर अपने यहां निजी प्रेक्टिस में सहायक स्टाफ को 5 से 10 हजार और अनुभवी को 15 से 20 हजार रुपए मासिक देते हैं।

शिकायतों की भी सुनवाई नहीं, गैर डिग्रीधारियों की मौज

युवाओं के साथ हो रहे इस शोषण की शिकायत दर्ज कराने का कोई उचित केन्द्र नहीं है। इससे गैर डिग्रीधारी पनप रहे हैं और सरकार के पास इनका कोई रेकार्ड भी उपलब्ध नहीं है। सरकारी स्तर पर इनकी भर्तियों की भी उचित व्यवस्था नहीं है।

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मनमानी करने वालों के खिलाफ एसोसिएशन लगातार अभियान चला रही है। लेकिन सरकार के दर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। लाखों रुपए खर्च कर फिजियोथैरेपिस्ट की डिग्री हासिल होती है। लेकिन यह वर्ग बिना पंजीकरण ही बेहद कम वेतन पर जॉब शुरू करने को मजबूर है।
डॉ.संजय कुमावत, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान चार्टेड एसोसिएशन आफ फिजियोथैरेपी

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कहीं भी चले जाओ, युवाओं के ऐसे इश्यू की कोई सुनवाई नहीं होती। सरकार की ओर से बनाई गई डिग्रियों को ही युवा हासिल करते हैं। लेकिन उनका ही मजाक बनाया जाता है। सरकार को सरकारी ही नहीं, निजी क्षेत्र में भी स्किल्ड डिग्री धारी इंटर्न का न्यूनतम ऐसा मानदेय तय करना चाहिए, जिससे वे अच्छे से अपना परिवार चला सके।
सर्वेश्वर शर्मा, अध्यक्ष, राजस्थान फार्मासिस्ट एसोसिएशन