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रगों में उतर रहा धीमा जहर

राज्य में हाल ही में डोडा-पोस्त की बिक्री बंद करने के साथ ही नशामुक्ति के प्रयास तेज हो गए हैं। जिले में भी इसका असर आया और इसके आदी लोगों ने न केवल व्यक्तिगत तौर पर नशा छोड़ा, बल्कि दर्जनों समाज बैठकों व आयोजनों में ये शपथ ले चुके हैं कि अब अफीम और डोडा-पोस्त की मनुहार सामाजिक कार्यक्रमों में नहीं
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Bajrang Lal

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Updated: 9 May 2016, 2:23 PM IST

छोटी सी तंबाकू की पुडि़या, गुटखे का पाउच या फिर बीड़ी-सिगरेट। शौकिया तौर पर शुरू किया और अब लत लग गई। लत भी इतनी बुरी की रगों में उतर रहा यह धीमा जहर थार में कैंसर के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ा रहा है। पहले माता-पिता और बड़े-बुजुर्ग गुटखा-तंबाकू के लिए डांटते थे, अब तो आलम यह है कि कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। एेसे में यह बुरी लत घर-घर दस्तक दे चुकी है और जवान जिंदगियां कैंसर की गिरफ्त में आ रही हैं।

बड़े पैमाने पर बिक्री
जिले में तंबाकू उत्पाद कितनी मात्रा में खाए जा रहे हैं इसका उदाहरण है यहां की मासिक बिक्री। जानकारों के अनुसार प्रतिदिन करीब 40 लाख के तंबाकू उत्पादन जिले में बिक रहे हैं। इसमें 10 लाख की बीड़ी-सिगरेट, 20 लाख का गुटखा और 10 लाख के करीब का तम्बाकू। यह बिक्री लगातार बढ़ रही है।

लत शराब से भी ज्यादा
शराब की जिले में बिक्री करीब 300 करोड़ की है। तंबाकू उत्पाद भले ही इस मामले में लागत में आधे हों, लेकिन वास्तव में व्यसनियों की संख्या शराब से बहुत अधिक है। शराब पीने वालों की संख्या एक अनुमान के मुताबिक जिले मेंं एक लाख के करीब होगी तो तम्बाकू उत्पाद के व्यसनी इसके दस गुणा।

कोई रोक-टोक नहीं
तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध के नाम पर सार्वजनिक स्थानों पर इनकी बिक्री पर रोक है। इसके अलावा बिक्री हो सकती है और कंपनियों को यह हिदायत है कि वे बड़े अक्षरों में चेतावनी लिखेंगे कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे कैंसर हो सकता है, इसके अलावा कोई प्रतिबंध नहीं है। जहां पहले तंबाकू उत्पाद खाने पर घर की युवा पीढ़ी को परिजन आंख दिखाते थे, वह आंखों की शर्म भी अब मिट चुकी है। एेसे में तंबाकू उत्पादों का सेवन खुलेआम हो गया है।

जर्दा और गुटखा सर्वाधिक
सिगरेट के व्यसनियों की संख्या पिछले सालों में घटी है। इसका कारण सिगरेट का महंगा होना है। बीड़ी भी अब ठेट ग्रामीण क्षेत्र में सीमित होने लगी है, लेकिन गुटखा और जर्दा आम होता जा रहा है। इसकी बिक्री सर्वाधिक हो रही है। करीब 30 लाख की बिक्री गुटखा व जर्दा की है।

परिजन आगे आएं
गुटखा और जर्दा खाने वालों के परिजन को पहल करनी होगी। वे अपने परिवार के सदस्य को इसे छोडऩे के लिए मजबूर नहीं करेंगे तब तक वह कभी ध्यान नहीं देगा। संस्थान और सामाजिक तौर पर भी लोगों को आगे आना होगा।
हनुमानराम डउकिया, सामाजिक कार्यकर्ता

आत्मचिंतन करे व्यसनी
तंबाकू उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और इन उत्पादों पर चेतावनी भी लिखी होती है, लेकिन यह समझ का विषय है। व्यसन करने वालों को खुद को सोचना चाहिए कि उनके जीवन और स्वास्थ्य के लिए यह घातक है तो फिर वे इसे छोड़ क्यों नहीं रहे हैं?
डॉ. रविन्द्र शर्मा, चिकित्सक