
Terrace Gardening
Small Farmhouse Provides Comfort: शहर के आसमान में कारखानों का धुआं उगलती चिमनियां..., वाहनों की रेलमपेल..., विकास की दौड़ में कम होते जंगल... और वायुमंडल की ओजोन परत को बढ़ता खतरा। सिकुड़ती जगह में पेड़ लगाने को जगह तक नहीं है। इन हालातों में शुद्ध हवा में सांस लेना भी दूभर हो रहा है। आने वाले दिनों में हालात और विकट होने वाले हैं।
सुकूनभरी सांस की चाह में टैरिस गार्डन का कल्चर जन्म ले रहा है। महानगरों की तरह कोटा में भी अब लोगों का टैरिस गार्डन की ओर रुझान बढ़ रहा है। घर-आंगन के साथ छतों पर गार्डन विकसित कर लोग सुकून भरी हवा में सांस ले रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी मानते हैं कि घर की शोभा बढऩे व फुलवारी के साथ गर्मी से भी हद तक बचाव हो रहा है। ऐसे मकानों में कम तापमान महसूस होता है। वहीं किचन गार्डन से तरोताजा सब्जियां भी मिल जाती हैं। कुछ तो कहते हैं कि उन्हें घर में कभी एसी की जरूरत महसूस नहीं हुई।
दुर्लभ प्रजातियों के पौधे भी लगाए छत पर
श्रीनाथपुरम क्षेत्र में कोर्ट से रीडर के पद से सेवानिवृत्त रमेश माथुर के घर की छत हैरत में डालने वाली है। यहां दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ मिलेंगे। उन्होंने मकान की पूरी छत को ही गार्डन बना डाला। छत पर 150 से अधिक प्रजातियों के करीब 700 से अधिक पेड़ व पौधे हैं। डायबिटीज से बचाव के लिए इंसुलिन का पौधा, हींग, इलाइची, लौंग समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लहलहा रहे हैं। धार्मिक उपयोग के पौधों में तुलसी, कल्पवृक्ष, सफेद चंदन, पीपल, सिंदूरी, एक मुखी रुद्राक्ष समेत कई पौधे छत पर लगे हैं। उन्होंने बताया गार्डन से गर्मियों में घर का तापमान 4-5 डिग्री बाहर से कम रहता है। माथुर बताते हैं कि बगीचे में 30 से 40 वर्ष की आयु के पेड़ भी लगे हैं। दिखने में ये पौधे लगते हैं, लेकिन इनमें फल भी लग रहे हैं। आम, पीपल, बड़, अमरूद, शहतूत, मौसमी समेत विभिन्न प्रजातियों के घने वृक्ष गमलों में लगे हैं। उन्होंने इन्हें विशेष तकनीक से तैयार किया है। इन पेड़ों के गुण भी सामान्य पेड़ों की तरह हैं।
पक्षियों ने बनाए घोंसले
बोरखेड़ा स्थित देवाशीष सिटी निवासी श्रद्धा ठाकुर ने तो घर को ही बगीचे का रूप दे डाला। यहां पक्षियों ने घोंसले भी बना लिए। घर-आंगन में विभिन्न प्रजातियों के करीब 1 हजार पेड़-पौधे लगा रखे हैं। जिनमें मनी प्लांट, स्पाइडर, जेड प्लांट, पैडिनियम, मोगरा, नीम, क्रिसमस ट्री, पाम, गुलदाउदी, चम्पा व सीजनेबल पौधे है। श्रद्धा बताती हैं कि वह हर दिन सुबह शाम 2-2 घंटे बगीचे को संवारती हैं। कौनसे पौधे में क्या खाद डालना है इसकी पूरी जानकारी है। घर में हरियाली के चलते एसी का उपयोग नहीं किया। श्रद्धा ने बताया कि किसी की बर्थडे पार्टी या अन्य समारोह में गिफ्ट के स्थान पर पौधे भेंट करती हूं।
एसी की नहीं जरूरत
श्रीनाथपुरम निवासी आयुर्वेदिक विभाग से सेवानिवृत चिकित्सा अधिकारी अनिल औदिच्य ने तो पूरे घर को ही बगीचा बना लिया और छत पर टैरिस गार्डन व किचन गार्डन तैयार कर लिया। वह बताते हैं कि अब उन्हें घर में एसी की जरूरत महसूस नहीं होती। एक कूलर से काम चल जाता है। घूमने के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ता। छत पर घूम लेते हैं। पेड़ पौधों की स्वयं रोजाना दो घंटे देखभाल करते हैं। उन्होंने विभिन्न प्रजातियों के करीब 700 पेड़-पौधे लगा रखे हैं। इसमें सहजन, मीठा नीम, अशोक, कनीर, बड़, पारस पीपल, केक्टस, आम, अनार, नीबू सहित सब्जियां भी उगा रखी हैं।
घर में बागवानी के फायदे
शहर के लोगों में रूफ गार्डनिंग की रुचि कोविडकाल के बाद से अधिक होने लगी है। यह हम सबके लिए फायदेमंद है।
यह कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन को परिवर्तित करती है।
पौधे प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से कार्बन डाई ऑक्साइड एवं पानी से क्रिया करके ग्लूकोज बनाते हुए सह उत्पाद के रूप में शुद्ध ऑक्सीजन पैदा करते हैं।
सीमेंट कांक्रीट की दीवारें एवं छत सूर्य की किरणों को अवशोषित कर तापमान बढ़ा देती हैं, जबकि पेड़-पौधे इसे कम अवशोषित करते हैं। परीणाम स्वरूप बागवानी वाली इमारतों का तापमान कम रहता है।
पक्षियों के लिए आवास बनता है।
वायु व शोर प्रदूषण को कम करती है।
सब्जियों की बागवानी से शुद्ध सब्जी मिल जाती है।
छत पर बागवानी वर्षा होने की संभावना को प्रबल करती है।
आवास व गलियारे में मनोरंजक माहौल बनाती है।
Published on:
14 May 2023 03:07 pm
