मुख्य सचिव ने जहां एसएमएस के जिम्मेदार अधिकारियों को कतारें कम कर मरीजों का दर्द कम करने की नसीहत दी वहीं इसके कुछ घंटों बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर और चिकित्सा शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों का संतुष्टि स्तर बढ़ने का दावा कर दिया। मंत्री और एसीएस ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि प्रदेश में 5 सप्ताह के दौरान किए गए 7600 निरीक्षणों से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और आइपीडी सेवाओं में मरीजों की संतुष्टि दर 75 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है। विभाग ने यह आकलन अस्पताल भवन, लेबर रूम, वार्ड में बैडशीट, इमरजेंसी सेवा, संविदा कार्मिकों के मानदेय की स्थिति, नि:शुल्क दवा और जांच योजना के संचालन, बायोमैट्रिक उपस्थिति, साफ-सफाई को लेकर किया गया है। हैरत की बात यह है कि अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को सर्वाधिक परेशानी देने वाली कतारों, रेफरेंस सुविधा और ऑनलाइन सिस्टम की खामियों को लेकर कोई आकलन विभाग ने नहीं किया।