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दूध के दाम बढ़े, गड़बड़ाया किचन का बजट

40 की जगह अब 44 से 50 रुपए लीटर बेचा जा रहा दूध, बढ़ी कीमतों पर प्रशासन का नियंत्रण नहीं, मिलावटखोरी का धंधा जारी, नहीं लिए जा रहे दूध के सेंपल

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Suresh Kumar Mishra

May 04, 2016

panna news

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पन्ना
जिले में दूध की कीमतों पर प्रशासन का नियंत्रण नहीं है। दूधिए और डेयरी संचालक मनमाने तरीके से कभी भी दूध के दाम बढ़ा लेते हैं। इस साल भी गर्मी शुरू होने के साथ ही डेयरी संचालकों ने उत्पादन कम होने का बहना बनाते हुए 4 से 10 रुपए प्रति किग्रा. दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। प्रशासन को इस बात की हवा तक नहीं कि कब दूध के दाम बढ़ गए और कितने बढ़ाए गए। मार्च तक जिले में दूध डेयरियों और घरों में 40 रुपए लीटर ही दूध दिया जाता था। अप्रैल से दूध के कम उत्पादन का हवाला देते हुए दूध 44 से 50 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। दरअसल दूध के दामों में प्रशासन का किसी तरह का कंट्रोल नहीं है। जिसकी सजा आम जनता को भुगतनी पड़ रही है।


मिलावट को लेकर ज्ञापन भी सौंपे

दूधियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों से सस्ते में दूध लाकर शहर में महंगा तो बेचा ही जा रहा है साथ ही मिलावटखोरी भी की जा रही है। इसके बाद भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस संबंध में पूर्व में एसडीएम पन्ना को स्थानीय लोगों ने ज्ञापन देते हुए कहा था कि दूध में खतरनाक केमिकल की मिलावट तक की जा रही है। इसके बाद भी डेयरी वालों और बाहर से लाकर दूध बेचने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है।


जिलेभर में संकट

जिला मुख्यालय ही नहीं गर्मी में पानी के संकट के कारण जिलेभर में दूध का संकट बना है। कस्बों में दूधियों ने दूध के दाम तो नहीं बढ़ए हैं, लेकिन उसमें पानी की मात्रा ज्यादा मिलाने लगे हैं। मिलावटी दूध बच्चों की सेहत भी बिगाड़ सकता है। दूध की गुणवत्ता देखने का कार्य प्रशासन का होता है। जिला मुख्यालय में सबसे अधिक दूध बिक्री के लिए अजयगढ़ क्षेत्र से आता है। वहां से दूध बेचने आने वाले लोग ही शहर में दूध के दाम तय करते हैं।


दामों में नहीं एकरूपता

शहर में दूध के दामों और क्वालिटी को लेकर एकरूपता नहीं है। शहर में कहीं 30 रुपए लीटर भी दूध मिल रहा है तो कहीं 44 से 50 रुपए भी। इसी तरह से इसकी गुणवत्ता को लेकर प्रशासन कभी ध्यान नहीं देता है। दूध के सेंपल भी साल में मात्र औपचारिकता के लिए ही भरे जाते हैं।

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