
नि: संदेह अमरीका दुनिया के सबसे सम्पन्न राष्ट्रों में शुमार है। सबसे शक्तिशाली देश तो है ही। माना जा सकता है कि दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भौतिक सुख-सुविधाओं के मामले में भी वह अव्वल देशों की सूची में आता है। ये तो हुआ सिक्के का एक पहलू। दूसरे पहलू पर नजर डाली जाए तो तस्वीर बेहद डरावनी नजर आती है। सिक्के का यह दूसरा पहलू है- अमरीकी नागरिकों में बढ़ता अवसाद और घरेलू परेशानियों से उपजा तनाव। अमरीका के लुइसियाना शहर में दो दिन पहले घरेलू विवाद के चलते एक बंदूकधारी ने अपने परिचितों के घर जाकर आठ मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस साल अब तक ११० दिनों में अमरीका में बंदूक हिंसा की लगभग इतनी ही घटनाएं हो चुकी हैं यानी हर दिन औसतन एक।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि साधन सम्पन्न होने के बावजूद अमरीकी अवसाद के शिकार होकर बंदूक का सहारा लेते नजर आते हैं। पिछले सालों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अमरीका में बंदूक हिंसा के कारण हर साल तीस से चालीस हजार लोग मौत के शिकार हो जाते हैं। अमरीकियों में बंदूक प्रेम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां कुल आबादी से अधिक संख्या में बंदूकें हैं। वर्ष २०१९ में लास वेगास शहर में हुई सामूहिक गोलीबारी में ५० से अधिक लोगों की मौत हुई थी। बंदूक तक आसान पहुंच होने के कारण अमरीका आज एक ऐसे संकट में फंस चुका है जहां से निकलना आसान नहीं। अमरीका में बंदूक से आत्महत्या करने वालों की संख्या भी दूसरे देशों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। अमरीकी संविधान अपने नागरिकों को हथियार रखने और साथ ले जाने का अधिकार देता है। यही अधिकार अमरीका में 'बंदूक संस्कृति' के रूप में डरावने ढंग से सामने आ रहा है। अमरीकी संसद में इस मुद्दे पर अनेक बार चर्चा हो चुकी है, पर इसका हल निकलना तो दूर समस्या और विकराल रूप लेती जा रही है। समूचा अमरीका इस मुद्दे को लेकर दो धड़ों में बंटा है। एक पक्ष बंदूक रखने के संवैधानिक अधिकार पर जोर देता है तो दूसरा पक्ष बंदूक संस्कृति पर नियंत्रण की मांग उठाता है। समझने की बात यह है कि कोई अधिकार और आजादी यदि मानवता की ही दुश्मन बन जाए तो क्या ऐसी आजादी पर अंकुश लगाने के लिए गंभीरता से विचार नहीं किया जाना चाहिए? यहां सवाल अकेले अमरीका का नहीं है। यूरोप के अनेक देश इस समस्या से ग्रसित हैं।
भारत के हालत भले ही अभी ज्यादा चिंताजनक नहीं हों, लेकिन बंदूक रखने को यहां भी सुरक्षा के बजाय प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाने लगा है। यहां लाइसेंसी बंदूक मिलना भले ही आसान नहीं हो, लेकिन देश में भी अवैध रूप से हथियार रखने के मामले सामने आते रहे हैं। हथियार का उपयोग आत्मरक्षा के लिए होना चाहिए न कि निहत्थों की जान लेने के लिए।
Published on:
21 Apr 2026 02:33 pm
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