
जयपुर।
नागौर से सांसद चुने जाने के बाद हनुमान बेनीवाल ( Nagaur MP hanuman beniwal ) ने कहा है कि वे संसद में पहुंचकर राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा ( Special Category Status for Rajasthan ) दिलाऊंगा। बेनीवाल ने ये प्रतिक्रिया विधायक पद से इस्तीफ़ा दने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कही। उन्होंने मीडिया के और भी सवालों के खुलकर जवाब दिए।
बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान को विशेष दर्जा दिलाये जाने की मांग को लेकर अगर जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर भी आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों की मांगों को पूरा करवाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
एमएलए से सांसद बने हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान ही नहीं पूरे देश को टोलमुक्त कराने के साथ-साथ प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के प्रयास करूंगा। राजस्थान के सभी मुद्दों को संसद में प्रमुखता के साथ उठाया जाएगा। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि राजस्थान में अब भले ही वह विधानसभा में ना रहें, लेकिन वह राजस्थान के लोगों की मांग अपने दोनों विधायकों से तो उठाएंगे ही।
मोदी टीम में तीन मंत्री, कुल 25 सांसद लोकसभा में, तो क्या अब मिलेगा विशेष राज्य का दर्ज़ा?
राजस्थान को भौगोलिक विषमताओं के आधार पर विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है। लेकिन अब तक इस सम्बन्ध में केंद्र की ओर से कोई सकारात्मक रुख देखने को नहीं मिला। अब जब की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ है और पहले ही मंत्रिमंडल में राजस्थान से तीन सांसदों को मंत्री बनाकर पीएम मोदी ने अपनी टीम में शामिल किया है। ऐसे में अब प्रदेश की जनता को फिर उम्मीद जगी है कि प्रदेश के सांसद विशेष दर्जा प्रदेश को दिलाने की दिशा में कोई कार्य करेंगें।
यही नहीं, राजस्थान में 25 की 25 सीटों पर जीत की पताका फहराते हुए 25 सांसद लोकसभा में पहुँच गए हैं। ऐसे में राजस्थान को विशेष दर्जा दिए जाने की संभावनाओं को फिर बल मिलता नज़र आ रहा है।
गौरतलब है कि अब तक देश में 11 राज्यों को ही विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है। राजस्थान के अलावा आंध्रा प्रदेश और बिहार समेत 5 राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की पुरज़ोर मांग कर रहे हैं।
क्या होता है विशेष राज्य का दर्जा?
दरअसल, किसी राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और संसाधन की स्थितियों को देखते हुए ही विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार स्व-विवेक से किसी राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे विशेष राज्य का दर्जा दिलाती है। विशेष राज्य का दर्जा मिलने के बाद कई तरह के फायदे होते हैं। इस श्रेणी में आने वाले राज्य की केन्द्रीय सहायता में बढ़ोतरी होती है, साथ ही केंद्र उस राज्य विशेष को कई तरह की योजनाओं को लागू करने के ऐवज में वित्तीय मदद भी देती है।
विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों को केंद्र सरकार से 90 फीसदी का अनुदान मिलता है। केंद्र सरकार से जो फंडिंग होती है उसमें 90 फीसदी अनुदान के तौर पर मिलती है और शेष 10 फीसदी राशि बिना किसी ब्याज के मिलती है। जिन राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है उन्हें केवल 30 फीसदी राशि अनुदान के रूप में मिलती है। 70 फीसदी राशि उनपर केंद्र का कर्ज होता है।
इसके अलावा जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्ज़ा मिला होता है उनको एक्साइज, कस्टम, कॉर्पोरेट और इनकम टैक्स में भी रियायत मिलती है। केंद्र सरकार जो हर साल बजट बनाती है उसमें से 30 फीसदी राशि विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को दी जाती है। अगर विशेष राज्य जारी बजट को खर्च नहीं कर पाती है तो पैसा अगले वित्त वर्ष के लिए जारी हो जाता है।
इन करों में ऐसी रियायतों से उस राज्य में पूँजी निवेश का आकर्षण बढ़ जाता है और इस कारण वहाँ रोजगार के कई अवसर पैदा हो जाते हैं। विशेष राज्य की स्थिति में केन्द्रीय योजनाओं में देनदारी बहुत कम हो जाने के कारण जो बचत होती है। उसका इस्तेमाल राज्य अपनी अन्य योजनाओं के लिए करते हैं। इसी बहाने राज्य को अपनी आधारभूत संरचनाओं और दूसरे उद्योगों के विकास करने का मौका मिल जाता है।
इन 11 राज्यों को मिला हुआ है विशेष राज्य का दर्जा
- असम, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।
जाने कब-कब मिला विशेष राज्य का दर्जा
- 1969-1974 – चौथी पंचवर्षीय योजना के दौरान पहली बार असम, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड।
- 1974-1979 – पाँचवी पंचवर्षीय योजना के दौरान हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा।
- 1990 के वार्षिक योजना में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम जुड़े।
- 2001 को उत्तराखंड को यह दर्जा मिला।
सांसद बने बेनीवाल ने दिया एमएलए पद से इस्तीफा
इससे पहले उन्होंने विधानसभा पहुंचकर बेनीवाल ने विधानसभाध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। स्तीफे के बाद बेनीवाल ने कहा कि आरएलपी ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से गठबंधन किया है। राजस्थान में आरएलपी रहेगी और अपने स्तर पर चुनाव लड़ेगी।
उन्होंने कहा कि उपचुनाव में वह खींवसर ही नहीं बल्कि मंडावा सीट से भी अपना कैंडिडेट उतार सकते हैं। मंत्री पद नहीं मिलने को लेकर बेनीवाल ने कहा कि मोदी सरकार में मंत्री पद हमारा मुद्दा नहीं था। मंत्री बनाना है या नहीं बनाना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है। मैंने कभी इसके लिए लॉबिंग नहीं की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार अभी बाकी है।
Published on:
05 Jun 2019 12:10 pm
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