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राजस्थान में गजब का सामाजिक न्याय—तीन वर्ष में तीन बार घोषणा फिर भी 6 लाख से ज्यादा दिव्यांगजन को बीपीएल के समान सुविधाएं नहीं

राज्य सरकार के जन घोषणा पत्र और फिर मुख्यमंत्री ने की थी प्रदेश के 6 लाख दिव्यांगजन को बीपीएल के समान सुविधाएं देने की घोषणा विशेष योग्यजन निदेशालय के अफसर दौड़ा रहे फाइलों में कागजी घोड़े

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goverment of rajasthan

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जयपुर.

राज्य सरकार के घोषणा पत्र और फिर मुख्यमंत्री की ओर से दो बार प्रदेश के छह लाख दिव्यांगजन के जीवन स्तर को उंचा उठाने के लिए बीपीएल के समान सुविधाएं देने की घोषणा हो चुकी है। लेकिन विशेष योग्यजन निदेशालय की उदासीनता के कारण दिव्यांगजन अब भी बीपीएल के समान सुविधाओं को पाने के हकदार नहीं हो सके हैं। निदेशालय के अफसर उच्च स्तर से अगर कोई दबाव आता है तो एक-दो दिन कागजी घोड़े दौडाते हैं और फिर मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जाता है। अब प्रदेश के दिव्यांगजन एक बार फिर कुछ दिनों बाद राज्य विधान सभा में पेश होने वाले बजट पर टकटकी लगाए बैठे हैं कि शायद उनकी उम्मीदें पूरी हो जाएं।

नाम विशेष योग्यजन निदेशालय, काम सामान्य जैसा भी नहीं
राज्य सरकार ने सभी विशेष योग्यजन को उनका हक दिलवाने ,जीवन स्तर उपर उठा कर उनको मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष योग्यजन निदेशालय स्थापित किया है। लेकिन निदेशालय के अफसरों के कामकाज की शैली विशेष तो छोड़ो सामान्य कामकाज जैसी भी नहीं दिख रही है। कहने को अफसरों की फौज निदेशालय में है और हर महीने इनके वेतन-भत्तों और सुविधाओं पर सरकार लाखों रुपए खर्च भी कर रही है। लेकिन दिव्यांगजन अपनी मांगों के लिए आए दिन धरने व तालाबंदी तक कर रहे हैं। विशेष योग्यजन निदेशालय के अफसर इनकी समस्याओं को लेकर इतने गंभीर नहीं है जितने मुख्यमंत्री स्वयं। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से दो बार घोणणा करने पर भी दिव्यांगजन को बीपीएल के समान सुविधाएं देने की घोषणा तीन वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं आना अफसरों की कार्यशैली को कठघरे में खड़े कर रहा है।

जबाव मांगा लेकिन अफसरों ने साधी चुप्पी
राज्य में डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट हेमंत भाई गोयल ने बीते 28 अक्टूबर 2021 को विशेष योग्यजन निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक को पत्र लिख कर मुख्यमंत्री की इस घोषणा के क्रियान्वयन की स्थिति जानने के लिए पत्र लिखा। लेकिन निदेशालय के अफसरों ने आज तक गोयल के पत्र का जवाब नहीं दिया। गोयल ने बताया कि अफसरों के इस रवैये के कारण ही पूरे प्रदेश में दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा में नहीं आ पा रहे हैं।

इस तरह हुई तीन बार घोषणा
- 2018 में कांग्रेस के जन घोषणा पत्र में

- विश्व दिव्यांगजन दिवस पर 2020 में मुख्यमंत्री की ओर से
- बजट 2021-22 में विधान सभा में पेश किए बजट में

जन घोषणा-पत्र में ये की गई हैं घोषणाएं

- दिव्यांगजन को मुफ्त शिक्षा, छात्रव़त्ति तथा व्यावसायिक शिक्षा भी मुफ्त में दी जाएगी ।

- दिव्यांगजन और उनके परिजन को बीपीएल के समान सभी सुविधाओं की उपलब्धता ।
- मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के तहत पांच सौ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय सहायता।

- दिव्यांगजन की पुत्रियों के विवाह की राशि बढ़ाना ।
- दिव्यांगजन को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श कर कार्ययोजना बनाना ।
- सार्वजनिक स्थलों पर दिव्यांजन की अभिगम्यता को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाना ।