14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मून की स्पेलिंग में एम कैपिटल हो या स्मॉल!

नई बहस: नासा और एपी में उभरे मतभेद, दोनों के अपने तर्क  

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Anoop Singh

Mar 07, 2020

मून की स्पेलिंग में एम कैपिटल हो या स्मॉल!

मून की स्पेलिंग में एम कैपिटल हो या स्मॉल!

वाशिंगटन. चांद (मून) की स्पेलिंग का पहला अक्षर एम 'कैपिटलÓ हो या 'स्मॉलÓ इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है। दुनिया की सबसे समृद्ध अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने स्टाइल गाइड में एम कैपिटल में लिखती है। वहीं, अमरीका की बड़ी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) अपनी स्टाइलबुक में इसे छोटा एम ही लिखना पसंद करती है। इतना ही नहीं सूर्य (सन) के पहले अक्षर में भी संस्था एस शब्द को छोटा ही लिखती है।
एपी का तर्क है कि पत्रकारिता में शैली के दिशानिर्देश स्थापित करने के लिए एक मानक के तौर पर वह ऐसा करती आ रही है। वेबस्टर का न्यू वल्र्ड कॉलेज डिक्शनरी, जो एपी का प्राथमिक शब्दकोश है, लोअरकेस का उपयोग करता है।
एपी की साइंस टीम में 'कैपिटलÓ और 'स्मॉलÓ लिखने को लेकर मतभेद है। कुछ का मानना है कि मून का पहला शब्द 'कैपिटलÓ होना चाहिए, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि इसे 'स्मॉलÓ ही लिखना चाहिए।
नासा ने बताए उपयोग
नासा के जानकार आगे बतातेे हैं कि शब्दों का उपयोग उनके नोट पर निर्भर करता है। जैसे, आवर सन लिखते समय सन को कैपिटलाइज करें, लेकिन अन्य सन को नहीं। सोलर सिस्टम और यूनिवर्स का पहला अक्षर कैपिटल न करें। वहीं, अर्थ (पृथ्वी) शब्द का उपयोग जब ग्रह के नाम के रूप में किया जाता है और वाक्य लिखने से पहले द शब्द का उपयोग करते हैं तो नेपच्यून या वीनस की स्पेलिंग का पहला अक्षर बड़ा नहीं होगा। नासा का तर्क है कि जब अर्थ की स्पेलिंग का पहला अक्षर छोटा लिखा जाता है, तो यह मिट्टी या जमीन को संदर्भित करता है, न कि पूरे ग्रह को। 'सन' और 'मून' के सामने 'दÓ का प्रयोग आवश्यकता के अनुसार करें।

नासा का अपना तर्क
नासा के लिए लिखने वाले ग्रहों के नाम जैसे अर्थ, मार्स, जूपिटर जैसे शब्दों का पहला अक्षर 'कैपिटलÓ में ही
लिखते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी के चंद्रमा का जिक्र करते समय मून को कैपिटलाइज करें; अन्यथा, 'द मून ऑर्बिट्स अर्थÓ, जूपिटर्स मून लिखते समय मून को स्मॉल लिखें।
वह चीज है नाम नहीं
एपी स्टाइलबुक के संपादक पाउला फ्रोक ने बताया, एपी स्टाइलबुक का निर्णय 'सूर्यÓ और 'चंद्रमाÓ को कम करने का निर्णय सालों पहले किया गया था, इसलिए मैं उस समय हुई चर्चाओं पर बात नहीं कर सकता। हम तर्क देंगे कि चांद एक 'चीजÓ है, 'चंद्रमाÓ नाम की चीज नहीं।
मुद्रण कार्यालय से भी पुष्टि
द मून शब्द में एम बड़ा अक्षर ही होगा। संयुक्त राज्य सरकार के मुद्रण कार्यालय ने खंड 3.31 के मैनुअल में यह लिखा है। यह अमरीकी पांडुलिपि संघ की स्टाइलशीट में भी है। द्गवेन्डेल मेंडेल, सेवानिवृत्त चंद्र विशेषज्ञ, नासा