16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी एक दुर्लभ जेनेटिक डिस्‍ऑर्डर, पीड़ित बच्चों को होती है बहुत परेशानी

स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी एक दुर्लभ जेनेटिक डिस्‍ऑर्डर है

2 min read
Google source verification
स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी एक दुर्लभ जेनेटिक डिस्‍ऑर्डर, पीड़ित बच्चों को होती है बहुत परेशानी

स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी एक दुर्लभ जेनेटिक डिस्‍ऑर्डर, पीड़ित बच्चों को होती है बहुत परेशानी

जयपुर। स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी एक दुर्लभ जेनेटिक डिस्‍ऑर्डर है, जो रीढ़ की हड्डी में मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य अधिकारियों और नीति निर्माताओं को इसे लेकर ध्यान देने की जरूरत है।

प्रोफेसर डॉ अशोक गुप्ता ने कहा कि भारत में 7,744 जीवित जन्मे शिशुओं में से 1 की अनुमानित घटना दर और 38 व्यक्तियों में से 1 की वाहक आवृत्ति के साथ, एसएमए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल चुनौती प्रस्तुत करता है। जो प्रभावित व्यक्तियों के परिणामों और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शीघ्र पता लगाने और हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के माध्यम से एसएमए का पता लगाने से मेडिकल टीम महत्वपूर्ण मोटर न्यूरॉन हानि होने से पहले हस्तक्षेप करने में सक्षम हो जाती है, जिससे संभावित रूप से गंभीर विकलांगता को रोका जा सकता है। जन्म के तुरंत बाद एसएमए वाले शिशुओं की पहचान करने के लिए नवजात स्क्रीनिंग कार्यक्रम एक अत्यधिक प्रभावी रणनीति के रूप में उभरा हैं। इसमें एक साधारण रक्त परीक्षण शामिल है जो एसएमए से जुड़े विशिष्ट आनुवांशिक मार्करों की पहचान करता है। नवजात शिशु की जांच द्वारा शीघ्र पता लगाने की सुविधा स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को जल्द से जल्द संभव चरण में हस्तक्षेप शुरू करने में सक्षम बनाती है, इस प्रकार सफल रोग प्रबंधन और बेहतर परिणामों की संभावना को अनुकूलित किया जाता है।

वर्ष 2013 से ही दुर्लभ रोग को नियंत्रित करने की नीतियां बनाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। हालांकि, अब दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति अस्तित्व में आ चुकी है, लेकिन इस नीति के वास्तविक रूप से लागू करने की रफ्तार काफी धीमी है और पर्याप्त नहीं है। पुरानी नीति में बीमारी के इलाज पर होने वाले खर्च के बंटवारे पर स्पष्टता नहीं है, लेकिन नई नीति में इस चुनौती का निपटारा किया गया है। इसमें कहा गया है कि दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए वित्तीय मदद हासिल करने के लिए मरीज अपने नजदीकी सेंटर ऑफ एक्सिलेंस से संपर्क कर दावे की जांच के बाद वित्तीय लाभ हासिल कर सकता है।

बता दें कि हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी से पीड़ित बच्चे की मदद की है। यह एसएमए के खिलाफ जंग में सामूहिक प्रयासों की ताकत की मिसाल है।