
जयपुर। आमेर तसहील के ग्राम मोठू का बास में 15 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि को ‘खुर्द-बुर्द’ करने का प्रयास किया जा रहा है। बाजार में इस जमीन की कीमत 40 करोड़ रुपए से अधिक है। जेडीए इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि, करीब चार वर्ष पहले जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने ही उक्त जमीन पर निर्माणों को अवैध मानते हुए कार्रवाई की थी।
मौजूदा स्थिति की बात करें तो सरकारी जमीन पर भूखंड सृजित कर बेचान किया जा रहा है। जेडीए और जिला प्रशासन से मिलीभगत कर भूमाफिया सरकारी भूमि को खुर्द बुर्द करने में लगे हैं।
आस-पास के कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और भूखंडों का बेचान करने में मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत की है।
क्या है पूरा विवाद
जानकारी अनुसार, वर्ष 1958 में रामचन्द्र नामक व्यक्ति को खसरा नंबर 5 में 15 बीघा भूमि कृषि प्रयोजनार्थ आवंटित की गई थी। आवंटन की शर्त थी कि 8 वर्ष के भीतर भूमि पर काश्त (खेती) करनी होगी। जांच में पाया गया कि इस शर्त का उल्लंघन हुआ, जिसके बाद 2003 में अतिरिक्त कलक्टर ने आवंटन निरस्त कर दिया।
-कानूनी लड़ाई के बाद 21 फरवरी, 2012 को पुन: न्यायालय अतिरिक्त कलक्टर (तृतीय) ने इस आवंटन को अवैध मानते हुए निरस्त करने का आदेश सुनाया।
कोर्ट में जेडीए की रहस्यमयी चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि जब मामला राजस्व मंडल से होता हुआ राजस्थान उच्च न्यायालय पहुंचा, तो जेडीए की कार्यशैली संदिग्ध हो गई। हाईकोर्ट ने याचिका की कमियां दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था, लेकिन जेडीए के अधिवक्ताओं और अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि 19 अगस्त 2023 को याचिका स्वत: ही खारिज हो गई।
याचिका खारिज होने के ढाई साल बाद भी न तो इसे बहाल कराने की कोशिश की गई और न ही स्थगन आदेश लिया गया।
जेडीए ने ये किया
जेडीए जोन-12 उपायुक्त रविंद्र कुमार शर्मा ने पंजीकरण एवं मुद्रांक विभाग के तीनों उप महानिदेशकों को पत्र लिखा। इस पत्र में लिखा कि ग्राम मोठू का बांस में सरकारी भूमि को खुर्द बुर्द किया जा रहा है। उक्त भूमि का विक्रय पंजीकृत न करें। इस रिपोर्ट में 54 खसरों का जिक्र किया है। साथ ही अलग से खसरा नम्बर 20, 74 और 75 के लिए अलग से नोट बनाकर लिखा है।
Updated on:
23 Apr 2026 06:41 am
Published on:
23 Apr 2026 06:40 am
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