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जयपुर में कुरियर से आई 7.50 करोड़ की जवाहरात चोरी, कमिश्नरेट पुलिस में हड़कंप

मुम्बई और दिल्ली के व्यापारियों ने जयपुर सप्लाई के लिए भेजा था माल कुरियर कंपनी के पांच कर्मचारी ही पार्सल से जवाहरात निकालकर भाग गए, पुलिस जुटी तलाश में  

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जयपुर. मुम्बई-दिल्ली से कुरियर के जरिए जयपुर भेजी गई 7.50 करोड़ रुपए कीमत की जवाहरात चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस को सूचना मिली तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सिंधीकैम्प थाना पुलिस के साथ डीएसटी और क्राइम ब्रांच की टीम जवाहरात चोरी करने के मामले में कुरियर कंपनी के ही पांच कर्मचारियों की तलाश में जुटी है। इस संबंध में कुरियर कंपनी के मैनेजर धर्मेन्द्र पाण्डे ने सिंधीकैम्प थाने में रविवार को रिपोर्ट दर्ज करवाई है। सोमवार रात तक आरोपियों का सुराग नहीं लग सका।


सिंधीकैम्प थानाधिकारी गुंजन सोनी ने बताया कि मुम्बई निवासी हाल अंबे एक्सप्रेस लोजिस्टिक प्रॉ. लि. के मैनेजर धर्मेन्द्र पाण्डे ने रिपोर्ट दी, जिसमें बताया कि 5 वर्ष पहले उनकी फर्म का कार्यालय गोपालजी का रास्ता स्थित नानाजी की गली में खोला गया।

यहां पर वर्तमान में सवाईमाधोपुर के विभिन्न स्थानों पर रहने वाले विकास कुमार गुर्जर, सुरेन्द्र कुमार गुर्जर, हरि ओम गुर्जर, देव नारायण गुर्जर व सीताराम गुर्जर काम कर रहे थे। कंपनी ने रेलवे स्टेशन रोड स्थित हाथी बाबू का बाग में कर्मचारियों के रहने के लिए किराए से मकान ले रखा है। 20 अप्रेल को परिवादी धर्मेन्द्र अवकाश पर चले गए।

कर्मचारी वैन की बजाय बाइक से गए एयरपोर्ट

परिवादी ने बताया कि 23 अप्रेल की सुबह 8.30 बजे कर्मचारी विकास गुर्जर व हरि ओम गुर्जर एयरपोर्ट पर मुम्बई-दिल्ली से आया पार्सल लेने वैन ले जाने की बजाय बाइक से गए। एयरपोर्ट पर सुबह 10.30 बजे पार्सल रिसीव कर मैनेजर को मोबाइल पर सूचना दी। दोनों को पार्सल लेकर गोपालजी का रास्ता ऑफिस पहुंचना था। लेकिन वहां नहीं पहुंचकर पार्सल हाथी बाबू का बाग मकान पर ले गए। यहां पर पार्सल को खोलकर 7.50 करोड़ रुपए कीमत की जवाहरात लेकर भाग गए। परिवादी ने 11 बजे पांचों कर्मचारियों को मोबाइल किया, लेकिन किसी ने भी रिसीव नहीं किया। कुछ देर बाद कर्मचारियों के मोबाइल बंद हो गए। इसकी जानकारी कंपनी निदेशक को दी गई और परिवादी ने फ्लाइट से जयपुर पहुंचकर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

एक कर्मचारी 3 दिन पहले ही लगा था

परिवादी ने बताया कि कर्मचारी सीताराम गुर्जर तीन दिन पहले ही काम पर लगा था। जबकि अन्य कर्मचारी पहले से काम कर रहे थे।