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Rajasthan Election: अब ‘चुनावी चाणक्य’ प्रशांत किशोर की राजस्थान में एंट्री, प्रत्याशी चयन को लेकर आई ये लेटेस्ट खबर

Rajasthan Assembly election 2023: राजस्थान पॉलिटिक्स में 'पीके' की वर्चुअल एंट्री, प्रशांत किशोर की देखरेख में शुरू हुई मुहीम, सोशल मीडिया पर कैंपेन- टारगेट पर यूथ, चुनाव लड़ने के इच्छुक युवाओं की हो रही तलाश, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में पूछ रहे 15 सवाल, राजस्थान सियासत में क्या दिखा पाएंगे कमाल?  

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नकुल देवर्षि/ जयपुर।

Rajasthan Assembly Election 2023 चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन स्वराज राजस्थान में भी अपनी सियासी ज़मीन तलाशती दिख रही है। इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रशांत किशोर की पार्टी ने युवाओं को टारगेट करते हुए एक वर्चुअल कैम्पेन शुरू किया है। प्रदेश में चुनावी वर्ष के बीच शुरू हुए इस कैम्पेन की चर्चा अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में भी होने लगी है।

इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) संस्था की मुहीम के तहत 'यूथ इन पॉलिटिक्स' के नाम से चल रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जारी कैंपेन चर्चा का विषय बना हुआ है। अकेले प्रशांत किशोर की तस्वीर के साथ जारी पोस्ट में 'राजस्थान में व्यवस्था बदलाव का हिस्सा बनने' की अपील की जा रही है। इसके साथ ही कैंपेन में रजिस्ट्रेशन के लिए एक ऑनलाइन लिंक भी जारी किया गया है।

15 सवाल, ले रहे जानकारियां
प्रशांत किशोर की तस्वीर के साथ जारी पोस्ट में व्यवस्था बदलाव की मुहीम में शामिल होने के लिए एक लिंक दिया गया है। ये रजिस्ट्रेशन का लिंक है जिसमें कुल 15 सवाल पूछे गए हैं। सवालों में सामान्य व्यक्तिगत जानकारियों के साथ ही ये भी पूछा जा रहा है कि क्या आप चुनाव लड़ने में इच्छा रखते हैं ? क्या आप आगामी 2023 राजस्थान विधानसभा चुनाव में काम करना चाहेंगे ?' ये भी पूछा गया है कि आप समाज के किस वर्ग से आते हैं ?

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प्रशांत किशोर के मार्गदर्शन में मुहिम
ऑनलाइन फॉर्म में साफ़ किया गया हुई कि 'यूथ इन पॉलिटिक्स' I-PAC की एक पहल है, जो प्रशांत किशोर के मार्गदर्शन में चलाई जा रही है। इसमें 18 से 40 वर्ष उम्र तक के युवाओं को चुनावी राजनीति में आने के लिए एक मंच प्रदान किया जा रहा है।

बिहार में पकड़ बना रहे मजबूत
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर फिलहाल बिहार की राजनीति में खासा सक्रीय हैं। बिहार विधानपरिषद की पांच सीटों पर हालिया संपन्न हुए चुनाव में भी प्रशांत किशोर ने किस्मत आज़माई थी। परिणाम में एक पीके के समर्थित प्रत्याशी की जीत ने सभी को चौंका कर रख दिया। दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर जदयू प्रत्याशी विजय रहे हैं।

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तब सीएम गहलोत बोले थे...
प्रशांत किशोर के नई पार्टी बनाये जाने से पहले उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाएं बनी थीं, लेकिन आखिर में जाकर बात नहीं बन पाई। उस दौरान प्रशांत किशोर और उनके पीके ब्रांड की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हुई थी। यहां तक कि इन चर्चाओं के बीच सीएम अशोक गहलोत की भी पीके को लेकर प्रतिक्रिया आई थी।

सीएम गहलोत ने तब मीडिया से बातचीत में कहा था कि प्रशांत किशोर जैसे और भी हैं। वो मोदी जी के साथ थे, नीतीश जी के साथ थे, वो इतने बड़े हो गए हैं इसलिए न्यूज़ हो गए हैं। पीके का नाम बड़ा हो गया है इसलिए चर्चा में हैं।

मंत्री गर्ग ने लिया था आड़े हाथ
गहलोत सरकार के मंत्री डॉ सुभाष गर्ग भी प्रशांत किशोर को आड़े हाथ ले चुके हैं। उन्होंने पीके की चर्चाओं के बीच उनका नाम लिए बगैर निशाना साधा था। एक ट्वीट प्रतिक्रिया में उन्होंने लिखा था, 'किसी संगठन को मजबूत और ताकतवर केवल नेतृत्व व कार्यकर्ता ही बना सकते हैं। कोई सलाहकार व सर्विस प्रोवाइडर नहीं। नेतृत्व को चाणक्य की जरूरत है, न कि व्यापारी की।'

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