
नगर परिषद के कार्यकाल को एक वर्ष पूर्ण होने को है, लेकिन शहर आवारा पशुओं की समस्या से मुक्त नहीं हो पाया है। आलम यह है कि हर गली-गली में आवारा पशुओं की धमाचौकड़ी रहती है। इससे बच्चों और बुजुर्गों की तो जान पर बन आती है। बावजूद इसके नगर परिषद हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हालांकि नगर परिषद ने चार माह पहले अभियान चलाकर आवारा पशुओं की धरपकड़ की थी, लेकिन उसका कहीं असर नजर नहीं आया।
कइयों ने गंवाई जान
आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए शहर की किसी भी गली से निकलना खतरे से खाली नहीं है। और तो और शहर की मुख्य सड़कों और हाईवे पर भी आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। अभी दो दिन पहले राष्ट्रीय राजमार्ग 15 पर एक बालक की आवारा पशु के कारण हुई दुर्घटना में मौत हो गई थी। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी है, लेकिन नगर परिषद ध्यान नहीं दे रही।
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