
जयपुर। चुनावी साल होने की वजह से सरकार अब हर कदम पर अपने कार्यकर्ताओं को जोड़ने में लगी है। इसी कड़ी में एक और कदम उठाया जा रहा है, जिसमें सरकार छात्रनेताओं का भी सहारा लेगी। अब सरकार हर छात्रनेता को भी एक टारगेट देने की तैयारी कर रही है, जिसमें उसे युवाओं से जुड़ना है और युवाओं की नब्ज टटोटली है कि आखिर उनका झुकाव किस ओर है। सरकार अब छात्र राजनीति के बहाने युवाओं की नब्ज टटोलने का प्रयास कर रही है। विजयी प्रत्याशियों के बारे में सभी जानकारियां मांगी गई हैं, जिसमें मतदाताओं से लेकर चुनाव कराने वाले व्याख्याता तक के बारे में जानकारी चाही गइ है। कहां छात्रनेता कमजोर रहे और कहां उन्होंने बढ़त हासिल की, इसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
इसके लिए कॉलेज आयुक्तालय ने पिछले साल हुए छात्रंसघ चुनाव के विजेता पदाधिकारियों की सूची मांगी है। गौरतलब है कि सत्र 2017—18 में छात्रसंघ चुनाव जीते पदाधिकारियों का कार्यकाल औपचारिक रूप से खत्म हो चुका है। प्रदेशभर में 28 अगस्त को पिछले साल चुनाव हुए थे और 4 सितम्बर को परिणाम आया था।
व्हाटस—अप नंबर भी मांगे
प्रदेश में नवम्बर—दिसम्बर में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार अभी से युवाओं की नब्ज टटोलने की तैयारी कर रही है। कॉलेज आयुक्तालय ने सभी कॉलेजों को पत्र भेजकर सत्र 2017—18 में जीते छात्रसंघ पदाधिकरियों की जानकारी भेजने को कहा है। कॉलेज प्रिंसिपल्स को कहा गया है कि वे आदेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। विजयी छात्रसंघ पदाधिकारियों के नाम और व्हाटस—एप नंबर भी मांगे गए हैं।
छात्रसंघ चुनाव 2017—18 के बारे में छात्र प्रतिनिध का मेल आईडी, जिला, कॉलेज का नाम, स्थान, मतदाता सूची के अनुसार कुल मतदाओं की संख्या मांगी गई है। इसके साथ ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के विजयी प्रत्याशी का नाम भी मांगा है। महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव से जुड़े व्याख्याताओं के नाम और मोबाइल नंबर तक मांगे गए हैं।
Published on:
14 May 2018 08:59 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
