2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान में विद्यार्थी चुन सकेंगे उर्दू को तीसरी भाषा

राजस्थान में जल्द ही विद्यार्थियों को तृतीय भाषा के रूप में उर्दू तथा अन्य भाषाओं को चुनने का विकल्प मिलेगा। शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि देवली उनियारा विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में विद्यालय विकास एवं प्रबंध समिति की ओर से प्रस्ताव आने पर उर्दू विषय खोला जाएगा।

2 min read
Google source verification

शिक्षा राज्यमंत्री ने सदन में की घोषणा
डोटासरा ने प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि उर्दू भाषा को तृतीय भाषा के रूप में पढऩा चाहने वाले विद्यार्थियों के लिए कम विकल्प होना चिंता का विषय है।
स्टाफिंग पैटर्न की हो रही है समीक्षा
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में तय किए गए स्टाफिंग पैटर्न के अनुसार कक्षा 6 से 8 में संस्कृत विषय के विद्यार्थी अधिक होने पर संस्कृत पढ़ाने तथा उर्दू भाषा के विद्यार्थी अधिक होने पर उर्दू पढ़ाने का प्रावधान था। राज्य सरकार की ओर इस स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा कर इसमें बदलाव के प्रयास किए जा रहे हैं।
3 साल तक होने चाहिए 10 विद्यार्थी
इससे उर्दू जैसी अन्य अल्पसंख्यक भाषा को पढऩे का भी विद्यार्थियों को पूरा मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास है कि कक्षा 6 से 8 में लगातार 3 सालों तक जहां उर्दू या अन्य तृतीय भाषा के 10 विद्यार्थी होंगे, वहां उस भाषा की कक्षा लगवाई जाएंगी।
कुछ स्कूलों में पहले से जारी उर्दू
इससे पहले डोटासरा ने विधायक हरीशचंद्र मीना के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत विधानसभा क्षेत्र देवली-उनियारा जिला टोंक में रा.उ.मा.वि. अलीगढ़, रा.उ.मा.वि. उनियारा, रा.बालिका उ.मा.वि. अलीगढ़ तथा रा.बालिका उ.मा.वि. उनियारा में उर्दू विषय संचालित है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा अंतर्गत उर्दू विषय का एक विद्यालय रा.उ.प्रा.वि. भानपुरा संचालित है।
प्रस्ताव मिलने पर खोलेंगे अतिरिक्त संकाय
उन्होंने कहा कि विद्यालयों से प्रस्ताव प्राप्त होने पर विभाग को प्राप्त अन्य प्रस्तावों के साथ, उपलब्ध करवाये गये वित्तीय प्रावधानों, स्थानीय शैक्षिक आवश्यकता, एसडीएमसी की रिपोर्ट आदि को मद्देनजर रखते हुए समग्र स्थिति का आकलन किया जाकर अतिरिक्त संकाय/विषय खोला जाना संभव हो सकेगा।
जिला शिक्षा अधिकारी को दिए अधिकार
उन्होंने बताया कि प्रदेश में राजकीय विद्यालयों में (कक्षा-1 से 8 तक) मांग के अनुसार एवं मानदण्डानुसार अल्पसंख्यक भाषा के माध्यम/तृतीय भाषा विषय प्रारम्भ करने के अधिकार संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को दिये गये हैं।