
इस एक बात पर ध्यान दें तो रुक जाएंगे सुसाइड
जयपुर। किसी परिवार ने आर्थिक तंगी के कारण परिवार सहित आत्महत्या कर ली, किसी छात्र ने पढ़ाई के दबाव में अपनी जान दे दी, किसी महिला ने गृहक्लेश के कारण मौत को मुंह लगा लिया तो किसी ने जिंदगी से हार कर मरना ही बेहतर समझा। ऐसे मामले हम अकसर अपने आस—पास देखते और सुनते हैं। लेकिन क्या जिंदगी जीने से ज्यादा आसान मौत चुनने का विकल्प हो सकता है। इसका जवाब है नहीं। दरअसल, आत्महत्या का मुख्य कारण है डिप्रेशन। डॉक्टर्स के अनुसार अगर समय रहते इस डिप्रेशन को पहचान लिया जाए और उसका सही तरीके से इलाज लिया जाए तो आत्महत्या के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।
मनोचिकित्सक डॉ अनीता गौतम का कहना है कि आत्महत्या जैसा कदम कोई एकदम से नहीं उठाता, उससे पहले व्यक्ति लंबे समय तक डिप्रेशन में रहता है। इस डिप्रेशन को परिवारजन और आस—पास के लोग गंभीरता से लें, तो ये भयावह कदम रोका जा सकता है। डॉ गौतम के अनुसार हर आयु वर्ग में डिप्रेशन वो कॉमन बात है, जो आत्महत्या को उकसाता है। इसलिए सही समय पर इसका इलाज जरूरी है। इतना ही नहीं आत्महत्या के प्रयास के बाद भी पीड़ित शख्स डिप्रेशन में ही रहता है और फिर से आत्महत्या का प्रयास कर सकता है। इसलिए डिप्रेशन को दूर करने के लिए डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है। सुसाइड सर्वाइवर और उनके परिवार के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है—
1. सुसाइड सर्वाइवर के आस—पास पॉजिटिव माहौल रखें।
2. बार—बार उसे आत्महत्या के प्रयास की बात ध्यान न दिलाएं।
3. मानसिक शांति के लिए मेडिटेशन करें।
4. सकारात्मक किताबें और विचार पढ़ना फायदेमंद होगा।
5. परिवार—दोस्त सब मिलकर वो कार्य करें जिससे सुसाइड सर्वाइवर को खुशी मिले।
आत्महत्या के मामले में राजस्थान का 12वां स्थान
आत्महत्या के मामलों में राजस्थान की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या के मामलों में देशभर में राजस्थान 12वें स्थान पर है। साल 2019 में 4531 आत्महत्या के मामले सामने आए। इससे पहले साल 2018 में इन मामलों की संख्या 4333 थी।
ये हैं आत्महत्या का प्रमुख कारण
डॉक्टर्स के अनुसार आत्महत्या का प्रमुख कारण बेरोजगारी और परिवारिक परेशानियां हैं। देशभर में हुईं आत्महत्याओं पर अध्ययन बताते हैं कि सुसाइड के 32 प्रतिशत मामले परिवारिक कलह और परेशानियों के थे। वहीं 25 प्रतिशत मामले में बेरोजगारी कारण बनी। करीब 17 प्रतिशत लोगों ने बीमारी, तो करीब 6 प्रतिशत लोगों ने नशे के लिए आत्महत्या की। वहीं लव अफेयर्स के कारण करीब पांच प्रतिशत लोगों ने मौत को गले लगाया। पढ़ाई के दबाव में दो प्रतिशत विद्यार्थियों ने सुसाइड किया।
Published on:
21 Nov 2020 02:55 pm
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