औरंगजेब की सेना जब गोनेर के लक्ष्मी जगदीश मंदिर को ध्वस्त करने के किए आगे बढ़ी तब सामरिया ठिकाने के ठाकुर सुजान सिंह पंच्याणोत की अगुवाई में राजपूतों और अन्य जातियों के वीरों ने मुगल सेना का मुकाबला किया और बलिदान देकर गोनेर के जगदीश मंदिर को बचा लिया।
अगस्त 1681 को मुगलों से हुए भीषण युद्ध में ठाकुर सुजान सिंह अपने बेटे किसनदास के साथ अंतिम सांस तक लड़ता रहा और अंत में अपना सिर कटा कर अतुलनीय बलिदान किया। सुजान सिंह की टुकड़ी ने इस युद्ध में करीब तीन सौ मुगल सैनिको को मौत के घाट उतारा।