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Chandra Grahan May 2021 चंद्रग्रहण का दिन पर ज्यादा चमकीला दिखेगा चांद, जानिए ब्लड सुपरमून का ज्योतिषीय महत्व

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जयपुर. आज साल का दूसरा चंद्रग्रहण है। हालांकि यह देश के कुछ हिस्सों में ही दिखाई देगा और यही कारण है कि इस आंशिक चंद्रग्रहण का कोई सूतक नहीं लगेगा। खास बात यह है कि चंद्रग्रहण के साथ आज सुपरमून का संयोग बन रहा है। पूर्णिमा के दिन ही घटने वाली इस अनूठी खगोलीय घटना में चंद्रमा धरती के सबसे नजदीक होता है। यही कारण है कि आम दिनों की तुलना में चंद्रमा ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। चंद्रमा की चमक भी ज्यादा दिखती है।

चंद्रग्रहण के साथ सुपरमून का संयोग 6 साल के बाद बन रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार असलियत में चंद्रमा यथास्थिति में ही रहता है पर धरती के बहुत पास होने से हमें उसके बड़ा और चमकीले होने का आभास होता है। चंद्रग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है जिससे सूर्य की रोशनी चांद तक नहीं पहुंच पाती। इससे चंद्रमा पर लाल रंग की चमक दिखाई देती है जिसके कारण इसे ब्लड सुपरमून कहते हैं।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत में चंद्रग्रहण दिन के 2 बजकर 17 मिनट से शुरू हो चुका है। चंद्रग्रहण शाम 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। कुल 5 घंटे 2 मिनट तक के इस आंशिक चंद्रग्रहण को देश के अधिकतर हिस्सों में देखा ही नहीं जा सकेगा क्योंकि ग्रहण अवधि में देश के ज्यादातर हिस्सों में चंद्रमा पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा। पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में ही चंद्रग्रहण का अंतिम काल देखा जा सकेगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि आज के ब्लड सुपरमून या चंद्रग्रहण का धार्मिक या ज्योतिषीय नजरिए से ज्यादा महत्व नहीं है। आंशिक चंद्रग्रहण होने और भारत में दिखाई नहीं देने से इसका सूतक भी नहीं लगेगा। ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार पूर्ण ग्रहण में ही सूतक काल के नियमों का ध्यान रखा जाता है। पूर्ण चंद्रग्रहण का सभी राशियों पर भी व्यापक असर पड़ता है। जिन हिस्सों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा वहां नियमों का पालन कर सकते हैं।