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आमेर में हाथी सवारी पर मंडराए काले बादल, सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों को घोषित किया अनफिट

बीस हाथी नहीं करा सकेंगे पर्यटकों को आमेर महल में सवारी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में हुए हैल्थ चैकअप में सामने आई सेहत की दिक्कतें, तीन को टीबी, 11 की एक आंख में पूर्णता अंधता तो तीन हाथियों को आराम दिया, अन्य हाथियों की आंख में भी कुछ न कुछ समस्या

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जयपुर। आमेर में कोरोना काल से ही गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हाथी मालिकों पर एक और पहाड़ टूटा है। क्योंकि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद वन व पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गठित समिति ने आमेर महल में देशी विदेशी पर्यटकों को हाथी सवारी कराने वाले 90 हाथियों में से 20 हाथियों को स्वास्थ्य परीक्षण के नतीजों के बाद सवारी कराने के लायक नहीं माना है। मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर उप वनसंरक्षक वन्यजीव जयपुर, उपकार बोराना ने इन हाथियों को हाथी सवारी से बाहर रखने संबधी आदेश हाथी मालिक विकास समिति को दे दिए हैं।


जानकारी के अनुसार हाथी सवारी से बाहर किए गए 20 हाथियों का बीते जुलाई माह में स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था। जिसकी रिपोर्ट में 3 हाथियों को टीबी की पुष्टि हुई है। वहीं 11 हाथियों की एक आंख में पूरी तरह से अंधता है। 3 हाथियों को शारीरिक कमजोरी के चलते पूर्णत आराम दिया गया है। इसके अलावा इनमें से अन्य हाथियों को आंखों की कोई न कोई बीमारी है।


वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन हाथियों में टीबी होने की पुष्ठि हुई है उनके उपचार के बाद संभवतया फिर से हाथी सवारी में लगाया जा सकता है।


कोरोना काल से ही फाके करने जैसी स्थिति में आ गए हाथी मालिकों पर यह किसी दुखों के पहाड से कम नहीं है। क्योंकि हाथी सवारी से ही उनका घर चल रहा था। कोरोना के कारण विदेशी पर्यटकों के आने का रास्ता वैसे ही बंद है। वहीं देसी पर्यटक भी इतने नहीं आ रहे थे कि हाथी मालिक किसी पर्यटकों को हाथी सवारी कराने से अपने घर का खर्च चला सकें।


वन विभाग के अधिकारियों को कहना है कि शारीरिक कारणों से हाथी सवारी से बाहर हुए हाथियों के लिए सरकार आर्थिक सहायता भी देती हैं। सवारी से बाहर होने वाले हाथी को 600 रुपए प्रति हाथी प्रतिदिन दिया जाता है। जिससे हाथी मालिक पर आर्थिक संकट नहीं आए।