चिकित्सकों ने बताया कि ऑपरेशन में करीब तीन घंटे लगे। ऑपरेशन के बाद पहली बार बच्ची को बिना परेशानी सुलाया जा सका। उसे छह दिन तक चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया फिर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. सजीव चौपड़ा, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. बीएल बैरवा, डॉ. मोहित एवं एनेस्थीसिया टीम से डॉ. शोभा पुरोहित, डॉ नीलू शर्मा शामिल थीं।